
PATNA. बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है! नीतीश कुमार की अगुवाई वाली बिहार सरकार ने जेपी आंदोलन के सेनानियों की सम्मान पेंशन को दोगुना करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार के इस निर्णय से RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पेंशन भी अब दोगुनी हो गई है।
सरकार ने जेपी सेनानी के पेंशन में की बढ़ोतरी
बिहार सरकार ने जेपी आंदोलन (1974) और आपातकाल (1975-77) के सेनानियों के लिए पेंशन में भारी इजाफा किया है:
6 महीने से अधिक जेल में रहे सेनानी: इनकी पेंशन ₹15,000 से बढ़कर ₹30,000 प्रति माह हो गई है।
6 महीने से कम जेल में रहे सेनानी: इनके लिए ₹7,500 की जगह अब ₹15,000 मासिक पेंशन मिलेगी।
परिवार को भी राहत: सेनानी की मृत्यु के बाद उनके जीवनसाथी को भी यह पेंशन मिलती रहेगी, जिससे परिवारों को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिला है।
लालू प्रसाद यादव, जो जेपी आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थे, इस योजना के लाभार्थियों में शामिल हैं। हालांकि, सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो खुद भी जेपी आंदोलन का हिस्सा रहे, इस पेंशन का लाभ नहीं लेते। यह बात नीतीश की निस्वार्थता को दर्शाती है, लेकिन लालू की दोगुनी पेंशन ने सियासी गलियारों में चर्चा जरूर छेड़ दी है!
3,354 सेनानियों को मिलेगा फायदा
बिहार में कुल 3,354 जेपी सेनानी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। जेपी आंदोलन ने देश में भ्रष्टाचार और राजनीतिक अनैतिकता के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाई थी, जिसने बाद में आपातकाल को जन्म दिया। इस आंदोलन में हजारों युवाओं ने अपनी शिक्षा और भविष्य की परवाह किए बिना हिस्सा लिया था।
चुनावी मास्टरस्ट्रोक?
यह फैसला विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया है, जिसने इसे सियासी रंग दे दिया है। जेपी आंदोलन ने बिहार को राष्ट्रीय राजनीति में नई पहचान दी थी। उस दौर में हजारों युवाओं ने अपनी पढ़ाई और भविष्य को दांव पर लगाकर लोकतंत्र की लड़ाई लड़ी। यह पेंशन वृद्धि उन सेनानियों के बलिदान को सम्मान देने का एक प्रयास है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले सेनानियों के लिए यह आर्थिक राहत एक बड़ा बदलाव लाएगी।




