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सीमांचल के सियासी रण में ओवैसी का दांव: ‘न्याय यात्रा’ के साथ बिहार चुनाव का आगाज, 2015 की तर्ज पर इतिहास रचने की तैयारी?

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सीमांचल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आज किशनगंज से अपनी चार दिवसीय 'सीमांचल न्याय यात्रा' शुरू की है। इस यात्रा का उद्देश्य बाढ़, बेरोजगारी और पिछड़ेपन जैसे मुद्दों को उठाकर क्षेत्र के लोगों

किशनगंज: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सीमांचल का सियासी रण एक बार फिर गर्म हो गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आज किशनगंज के रूईधासा मैदान से अपनी चार दिवसीय ‘सीमांचल न्याय यात्रा’ का आगाज किया। यह यात्रा 27 सितंबर तक किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जिलों के विभिन्न हिस्सों में चलेगी, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के विकास और लोगों के अधिकारों के लिए जन जागरूकता फैलाना है।

ओवैसी ने अपनी यात्रा के पहले दिन बेरोजगारी, बाढ़ से तबाही, खराब बुनियादी ढांचे और अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे कथित अत्याचार जैसे मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सीमांचल के लोगों को उनका हक दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। स्थानीय कार्यकर्ताओं में इस यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह दिख रहा है। एक युवा कार्यकर्ता ने कहा, “ओवैसी साहब हमारी उम्मीद हैं। सीमांचल की आवाज को अब दबाया नहीं जा सकेगा।”

सियासी इतिहास और ओवैसी फैक्टर

सीमांचल बिहार की राजनीति में हमेशा से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। 2015 के विधानसभा चुनाव में, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण पर दिए गए बयान को लालू यादव ने हथियार बनाकर महागठबंधन के पक्ष में एक मजबूत लहर खड़ी कर दी थी, जिसके परिणामस्वरूप महागठबंधन को सीमांचल की 24 सीटों में से लगभग सभी सीटों पर जीत मिली। 2020 के चुनाव में भी ओवैसी फैक्टर ने कमाल कर दिया था, जब उनकी पार्टी ने 14 प्रतिशत वोट हासिल कर 5 सीटें जीतीं, जो तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए काफी थीं।

अब एक बार फिर ओवैसी अपनी ‘सीमांचल न्याय यात्रा’ के साथ उसी तरह का सियासी माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बार उनका दांव बाढ़, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली और पिछड़ेपन के मुद्दों पर है। ओवैसी को उम्मीद है कि ये मुद्दे आम लोगों को प्रभावित करेंगे और 2020 की तरह ही इस बार भी वे महागठबंधन का खेल बिगाड़ सकते हैं।

न्याय यात्रा: क्या बदलेगा सियासी समीकरण?

ओवैसी और उनके समर्थक ‘न्याय यात्रा’ को सीमांचल की राजनीति में एक नया अध्याय मान रहे हैं। यात्रा के दौरान, ओवैसी अपनी एक बड़ी मांग को भी प्रमुखता से उठा रहे हैं – संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत ‘सीमांचल विकास परिषद’ का गठन और क्षेत्र को विशेष दर्जा देना। यह मांग लोगों को आकर्षित कर रही है।

जिस तरह 2015 में लालू यादव ने मोहन भागवत के बयान को भुनाकर भाजपा को करारी शिकस्त दी थी, ठीक उसी तरह 2025 में ओवैसी ‘न्याय’ के नारे के साथ सियासी समीकरण बदलने की कोशिश कर रहे हैं। इस यात्रा से साफ है कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में सीमांचल एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभा सकता है और ओवैसी फैक्टर को नजरअंदाज करना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा।

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