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GST 2.0: मोदी सरकार के जीएसटी में बदलाव से क्या होगा सस्ता?

पीएम मोदी की 'नेक्स्ट-जनरेशन' कर प्रणाली, आम आदमी को बड़ी राहत की उम्मीद

दशहरा-दिवाली तक लागू हो सकते हैं बड़े बदलाव; 12% और 28% के स्लैब खत्म, रोजमर्रा की चीजें होंगी सस्ती; 40% की नई दर भी प्रस्तावित
NEW DELHI; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषण में ‘नेक्स्ट-जनरेशन जीएसटी’ (GST 2.0) सुधारों की घोषणा कर देश को एक बड़ा आर्थिक तोहफा दिया है। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना और आम लोगों पर से कर का बोझ कम करना है। सूत्रों के मुताबिक, ये बदलाव इस साल दशहरा या दिवाली तक लागू किए जा सकते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को त्योहारी सीजन में बड़ी राहत मिल सकेगी।

‘GST 2.0’: कर स्लैब का सरलीकरण
इस नए ब्लूप्रिंट के तहत, जीएसटी की जटिल दरों को घटाकर केवल दो मुख्य स्लैब में सीमित किया जाएगा: 5% और 18%। सरकार का यह कदम जीएसटी व्यवस्था के लागू होने के आठ साल बाद उठाया गया है। इस बदलाव से मौजूदा 12% और 28% के टैक्स स्लैब पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। इसके अलावा, सिगरेट और शराब जैसे ‘सिन गुड्स’ (हानिकारक वस्तुओं) पर 40% का एक नया स्लैब लागू किया जाएगा।

क्या होगा सस्ता, क्या होगा महंगा?
यह प्रस्तावित बदलाव सीधे तौर पर आम उपभोक्ता की जेब पर असर डालेगा। सूत्रों के मुताबिक, 12% के स्लैब में आने वाले लगभग 99% सामानों को 5% के स्लैब में लाया जाएगा। इसमें खाने-पीने का सामान, दवाइयां, स्टेशनरी, मेडिकल डिवाइस, टूथब्रश, और हेयर ऑयल जैसी रोजमर्रा की चीजें शामिल हैं।

वहीं, 28% के टैक्स स्लैब में आने वाले अधिकांश सामानों को 18% के दायरे में लाया जाएगा। इससे एसी, टीवी और रेफ्रिजरेटर जैसे मध्यम वर्ग के सामान भी सस्ते हो सकते हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य और टर्म इंश्योरेंस पर भी जीएसटी दर घटाने का प्रस्ताव है, जिससे ये सेवाएं आम लोगों के लिए अधिक सस्ती हो जाएंगी।

इन क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा फायदा
प्रस्तावित जीएसटी सुधारों से अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार ने कपड़ा, खाद, नवीकरणीय ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, हस्तशिल्प, कृषि, स्वास्थ्य और बीमा जैसे आठ प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है, जिन्हें इस बदलाव से सबसे ज्यादा फायदा होगा।

यह कदम उद्योगों और कारोबारियों के लिए भी फायदेमंद होगा। विभिन्न उत्पादों पर अलग-अलग दरों के कारण नमकीन, पराठा, बन्स और केक जैसे सामानों के वर्गीकरण को लेकर होने वाले विवाद भी खत्म हो जाएंगे। हालांकि, हीरे और कीमती पत्थरों जैसे श्रम-प्रधान और निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों पर 0.25% और आभूषणों पर 3% की विशेष दरें बनी रहेंगी।

अंतिम फैसला GST काउंसिल के हाथ में
सरकार ने इस संबंध में अपना प्रस्ताव जीएसटी युक्तिकरण की जांच कर रहे मंत्रियों के समूह (Group of Ministers) को भेज दिया है। यह समूह अपनी सिफारिशें जीएसटी काउंसिल को देगा, जो कि केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों से मिलकर बनी एक सर्वोच्च निकाय है। जीएसटी काउंसिल को यह अधिकार है कि वह इन सिफारिशों को स्वीकार, संशोधित या खारिज कर सकती है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि सरकार ने राज्यों के साथ इस पर चर्चा की है, जिससे यह उम्मीद बढ़ गई है कि यह प्रस्ताव जल्द ही पारित हो जाएगा।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि ऑनलाइन गेमिंग को ‘हानिकारक वस्तुओं’ की श्रेणी में रखा जा सकता है, जिस पर अधिकतम टैक्स दर लागू होगी। वहीं, पेट्रोलियम उत्पादों को अभी भी जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।

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