
PATNA. बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है। विपक्ष ने मतदाता सूची से ‘लाखों नाम हटाने’ का आरोप लगाकर इसे ‘वोट चोरी’ बताया है। उधर, चुनाव आयोग इस सूची को दुरुस्त करने की नियमित प्रक्रिया बता रहा है। इस बीच, आयोग ने नागरिकों से 1 सितंबर तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए आवेदन करने की अपील की है। आवेदन के लिए नागरिक ऑनलाइन पोर्टल http://voters.eci.gov.in या ECINet मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, ऑफलाइन आवेदन बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) या प्रखंड कार्यालय के माध्यम से जमा किए जा सकते हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, 1 से 11 अगस्त तक हजारों आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें फॉर्म-6 (नया पंजीकरण), फॉर्म-7 (नाम हटाने) और फॉर्म-8 (विवरण संशोधन) शामिल हैं। दावों और आपत्तियों का निपटारा 25 सितंबर तक पूरा होगा, और 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
SIR at the center of the controversy
चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को SIR शुरू किया था, ताकि मृत, डुप्लिकेट और प्रवासी मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को शुद्ध किया जा सके। आयोग के मुताबिक, 25 जून से 26 जुलाई तक 7.89 करोड़ में से 7.24 करोड़ मतदाताओं ने अभियान में भाग लिया। लेकिन ड्राफ्ट सूची में 65 लाख नाम कम होने से विवाद भड़क गया। विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस और RJD, ने दावा किया कि यह प्रक्रिया दलित, अल्पसंख्यक और प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाकर उनके वोटिंग अधिकार छीन रही है। RJD नेता तेजस्वी यादव ने मीडिया के सामने आकर चुनाव आयोग की खामियां बतायी. साथ ही अपनी वोटर आईडी गायब होने का दावा कर इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ बताया था।
What the Supreme Court said
सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2025 को SIR की प्रक्रिया और समयसीमा पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि कम साक्षरता और प्रवास की समस्या वाले बिहार में इतने कम समय में इतना बड़ा अभियान कैसे संभव है? कोर्ट ने आधार, राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को शामिल करने का सुझाव दिया, क्योंकि आयोग की 11 दस्तावेजों की सूची को सख्त माना गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रक्रिया बिना राजनीतिक दलों से सलाह के शुरू हुई, जिससे लाखों गरीब मतदाताओं के अधिकार खतरे में हैं।
Opposition’s uproar, Commission’s reply
विपक्षी नेताओं, जैसे राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे, ने संसद से निर्वाचन आयोग के दफ्तर तक मार्च निकाला। AAP ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया कि मृत व्यक्तियों के नाम सूची में हैं, जबकि वास्तविक मतदाताओं को दस्तावेजीकरण की जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। जवाब में, आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि बिना नोटिस और सुनवाई के किसी का नाम नहीं हटाया जाएगा। आयोग ने 1.5 लाख बूथ लेवल एजेंट्स की मदद से पारदर्शिता का दावा किया और स्पष्ट किया कि आधार को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा, लेकिन पहचान के लिए इसका उपयोग हो सकता है।
What should voters do?
नाम जांचें: मतदाता सूची में अपना नाम, पता और अन्य विवरण वोटर हेल्पलाइन ऐप, निर्वाचन आयोग की वेबसाइट या बीएलओ के माध्यम से जांचें।
नाम जोड़ें: 18 वर्ष से अधिक आयु के नए मतदाता या जिनका नाम सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 भरें।
नाम हटाएं: अयोग्य व्यक्तियों (मृत या स्थानांतरित) के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा करें।
विवरण संशोधन: नाम, पता, उम्र आदि में सुधार के लिए फॉर्म-8 भरें।
मतदान केंद्र बदलें: एक ही निर्वाचन क्षेत्र में मतदान केंद्र बदलने के लिए फॉर्म-8 का उपयोग करें।
चुनाव आयोग की तैयारियां:
आयोग ने निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों को हर सप्ताह राजनीतिक दलों को दावों और आपत्तियों की सूची साझा करने का निर्देश दिया है। साथ ही, मतदान केंद्रों पर पेयजल, बिजली, शौचालय, रैंप और हेल्प डेस्क जैसी सुविधाओं की स्थलीय जांच का आदेश दिया गया है।




