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Hartalika Teej Katha: इस कथा के बिना अधूरा है हरतालिका तीज का व्रत, स्वयं मां पार्वती ने की थी ये पूजा

नई दिल्ली।Hartalika Teej Katha: हिंदू धर्म में तीन तरह के तीज मनाए जाते हैं। इसमें हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज व्रत शामिल हैं. इसमें हरियाली तीज और कजरी तीज व्रत रखे जा चुके हैं। वहीं अब हरतालिका तीज मनाई जाएगी। हर साल भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं और वैवाहिक जीवन में सुखशांति व संतान प्राप्ति की कामना करती है। ऐसे में इस बार यह पर्व 26 अगस्त को मनाया जाएगा। तो चलिए जानते हैं इसका शुभ मुहूर्त क्या है।

हरतालिका तीज शुभ मुहुर्त

हरतालिका तीज का त्योहार 26 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 05:56 से 08:31 तक रहेगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 25 अगस्त की दोपहर 12:34 से 26 अगस्त की दोपहर 01:54 तक रहेगी।

पूजा विधि

तीज वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हरे या लाल रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके एक लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाएं और माता पर्वती, भगवान शिव और गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद विधिपूर्वक पहले प्रथम पूज्य गणेश भगवान की पूजा करें और गौरी-शंकर की पूजा करके मां गौरी को 6 शृंगार की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद कथा सुनें और आरती करके अपनी पूजा पूरी करें।

हरतालिका तीज की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई जन्मों तक कठोर तपस्या की। उन्होंने अपने बाल्यावस्था में ही हिमालय पर्वत पर गंगा तट पर कठोर तप करना शुरू कर दिया। माता पार्वती ने इस तप में अन्न और जल का त्याग कर दिया था और सिर्फ सूखे पत्तों का सेवन किया करती थी।

Hartalika Teej Katha: वहीं एक बार देवऋषि नारद उनके पास भगवान विष्णु के विवाह प्रस्ताव को लेकर माता पार्वती के पास पहुंचे, लेकिन वह इस प्रस्ताव से दुखी थी और उन्होंने अपनी सखी को अपनी पीड़ा बताई। तब सखी की सलाह पर पार्वती जी ने घने वन में एक गुफा में भगवान शिव की अराधना की। भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में पार्वती जी ने मिट्टी से शिवलिंग बनकर विधिवत पूजा की और रातभर जागरण किया। उनकी तपस्या से खुश होकर शिव जी ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तब से लेकर आज तक इसे तीज के रूप में मनाया जाता है।

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