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गांव से ग्लोबल स्टेज तक का सफर: आदर्श ने दुनिया को दिखाया कि सपने देखने के लिए किसी की अनुमति नहीं चाहिए

ग्लोबल स्टूडेंट प्राइज-2025 के टॉप-10 फाइनलिस्ट में आदर्श कुमार का नाम शामिल हुआ है। दुनिया भर से 11,000 से अधिक आवेदकों के बीच चुने गए ये छात्र नेतृत्व, सामाजिक प्रभाव, नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन कर रहे हैं। यह पुरस्कार उन चुनिंदा छात्र-नायकों को दिया जाता है, जिन्होंने न केवल अपने अध्ययन में योग्यता दिखाई है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की भी भरपूर कोशिश की है। आदर्श कुमार भारत के एकमात्र ऐसे छात्र हैं, जिन्होंने इस प्रतिष्ठित सूची में जगह बनाई है, जो युवा प्रतिभाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा हैं।

पटना, बिहार: पूर्वी चंपारण जिले के एक छोटे से गाँव पुरैना में जन्में, जहाँ अवसर दूर और सुविधाएँ सीमित थीं, आदर्श कुमार ने यह साबित कर दिया है कि काबिलियत उम्र की मोहताज नहीं होती है। 16 साल के इस युवा ने अपने दृढ़ निश्चय और सीखने की अदम्य जिज्ञासा के दम पर न केवल अपने गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, बल्कि अब वे ग्लोबल स्टूडेंट प्राइज-2025 के टॉप-10 की फाइनल सूची में शामिल होने वाले भारत के एकमात्र छात्र बन गए हैं। यह उपलब्धि दुनिया भर के 11,000 से अधिक आवेदकों के बीच उन्हें मिली है, जो उनके असाधारण नेतृत्व, सामाजिक प्रभाव, नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण है।

एक साधारण किसान के घर में पले-बढ़े आदर्श का शुरुआती जीवन चुनौतियों से भरा था। उनकी माँ मोनिका उपाध्याय चाहती थीं कि उन्हें सबसे अच्छी शिक्षा मिले, इसलिए उनका दाखिला एक डीएवी स्कूल में कराया गया। यह उनके लिए एक नई दुनिया थी, जहां उन्होंने अपनी मातृभाषा भोजपुरी को छोड़कर हिंदी और फिर अंग्रेजी सीखने का सपना देखा। इसी दौरान, जब उनके पास स्मार्टफोन और फिर एक लैपटॉप आया, तो इंटरनेट उनके लिए ज्ञान का एक अनंत सागर बन गया। जियो क्रांति ने इस प्रक्रिया को और भी आसान बना दिया। जल्द ही उन्होंने ऐप और वेबसाइट बनाना सीख लिया और यहीं से उद्यमिता के प्रति उनकी रुचि पैदा हुई।

चुनौतियों से बड़ा था सपना

बचपन से ही आदर्श ने अपने आस-पास के लोगों को समस्याओं से जूझते देखा था, और वे हमेशा उनके लिए कुछ करना चाहते थे। उन्होंने ‘मिशन बदलाव’ जैसे सामाजिक और राजनीतिक अभियानों से जुड़कर 1300 से अधिक परिवारों के जीवन में बदलाव लाने में मदद की, जहाँ उन्हें यह एहसास हुआ कि अशिक्षा ही कई समस्याओं की जड़ है। इसी सोच के साथ, उन्होंने 2020 में अपना पहला स्टार्टअप 2 Trillion शुरू किया, लेकिन लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण यह बंद हो गया। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी।

आईआईटी-जेईई की तैयारी के लिए कोटा जाने का उनका फैसला भी आर्थिक तंगी के कारण अधूरा रह गया। लेकिन इस अनुभव ने उन्हें एक बड़ी सीख दी—शिक्षा और कौशल सिर्फ पारंपरिक संस्थानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इंटरनेट अवसरों से भरा है।

‘स्किलजो’ के साथ शिक्षा में क्रांति

अपनी इस सीख को दूसरों तक पहुंचाने के लिए, आदर्श ने जुलाई 2023 में ‘स्किलजो’ की स्थापना की। यह एक ऐसा मुफ्त ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो छात्रों को व्यावहारिक अनुभव, नेटवर्किंग और कौशल विकास का प्रशिक्षण देता है। वह मानते हैं कि स्कूल स्तर पर छात्रों में एक्सपोजर, अनुभव और सही नेटवर्क की कमी होती है, और स्किलजो इसी अंतर को पाटने का काम कर रहा है।

सिर्फ एक साल में, स्किलजो ने 7,000 से अधिक और अब तक 20,000 से ज्यादा छात्रों को आधुनिक कौशल और मेंटरशिप प्रदान की है। इस मंच ने आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी मद्रास, गूगल (Canvas8) और जयश्री पेरीवाल इंटरनेशनल स्कूल (जेपीआईएस) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझेदारी की है। इन साझेदारियों से छात्रों को उद्यमिता और विदेश में पढ़ाई के अवसरों के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिलता है।

बड़ा सपना, बड़ी सफलता

आदर्श।

आदर्श की लगन और प्रतिभा को जयपुर के जयश्री पेरीवाल इंटरनेशनल स्कूल (जेपीआईएस) ने पहचाना, जिसने उन्हें 30 लाख की फुल स्कॉलरशिप प्रदान की। यह एक ऐसे छात्र के लिए अविश्वसनीय था जो कभी आईबी स्कूल की फीस को सुनकर हैरान रह गया था। अब वे जयपुर में इंटरनेशनल डिप्लोमा कर रहे हैं और उनका अगला लक्ष्य यूएस जाकर बैचलर डिग्री लेना है।

इसके साथ ही, आदर्श अपनी जड़ों को नहीं भूले हैं। वे IGNITE BHARAT कार्यक्रम के माध्यम से पूर्वी चंपारण जिले के 10,000 से अधिक छात्रों को मुफ्त में उद्यमिता, डिजाइन सोच और व्यक्तिगत ब्रांडिंग जैसे कौशल सिखाने के मिशन पर हैं। इस कार्यक्रम को आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी बॉम्बे और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा तैयार किया गया है।

आदर्श की सफलता हमें यह सिखाती है कि सपने देखने के लिए किसी से अनुमति नहीं, बस उन्हें पूरा करने का साहस चाहिए। उनके इस असाधारण सफर का श्रेय उनकी माँ मोनिका उपाध्याय और पिता मनोज कुमार उपाध्याय को जाता है, जिनका समर्थन उनके लिए अमूल्य है। आदर्श कहते हैं, “यह कहानी अभी लिखी जा रही है,” और उनका लक्ष्य अगले 12 महीनों में एक लाख छात्रों को प्रशिक्षित करना है। यह दिखाता है कि उनके सपने अभी और भी बड़े हैं।

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