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विपक्ष शासित आठ राज्यों ने जीएसटी दरों में कटौती के प्रस्ताव का किया समर्थन, मुआवज़े और उपभोक्ता हितों पर रखीं शर्तें

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा – कर्नाटक, केरल, पंजाब, बंगाल समेत आठ राज्यों ने जीएसटी स्लैब घटाने के केंद्र के सुझाव को मंजूरी दी, लेकिन राजस्व घाटे की भरपाई और उपभोक्ताओं तक राहत पहुँचाने की मांग की

नई दिल्ली. देश में माल एवं सेवा कर (GST) की मौजूदा जटिल कर संरचना को सरल बनाने की दिशा में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को कहा कि विपक्ष शासित आठ राज्यों ने जीएसटी दरों में कटौती और स्लैब की संख्या घटाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया है। हालांकि, इन राज्यों ने उपभोक्ता हितों और राज्यों की राजस्व सुरक्षा से जुड़ी कई शर्तें भी रखी हैं।

केंद्र का नया प्रस्ताव क्या है?

केंद्र सरकार ने जीएसटी काउंसिल के सामने सुझाव रखा है कि मौजूदा चार दरों (5%, 12%, 18% और 28%) को घटाकर सिर्फ दो दरें – 5% और 18% – कर दी जाएं। आवश्यक वस्तुएं और बड़े पैमाने पर खपत वाले सामान 5% स्लैब में रखे जाएंगे। सामान्य वस्तुएं और सेवाएं 18% स्लैब में आएंगी। इसके अलावा, शराब, सिगरेट और लग्ज़री वस्तुओं जैसे ‘सिन गुड्स’ पर 40% का विशेष कर लगाने का प्रस्ताव है।

किन राज्यों ने समर्थन दिया?

कांग्रेस नेता रमेश ने बताया कि विपक्ष शासित कर्नाटक, केरल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और झारखंड ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। ये राज्य मानते हैं कि मौजूदा टैक्स ढांचा उपभोक्ताओं और कारोबारियों, खासकर MSME सेक्टर के लिए बोझिल है।

विपक्षी राज्यों की मुख्य मांगें

हालांकि, इन आठ राज्यों ने इस समर्थन के साथ कुछ शर्तें भी रखीं:

उपभोक्ता तक लाभ पहुंचे : दरों में कटौती का सीधा फायदा दुकानदार या कंपनियों तक ही सीमित न रह जाए, बल्कि उपभोक्ता तक पहुंचे। इसके लिए कड़ा तंत्र बनाने की मांग की गई।

राजस्व मुआवज़ा अनिवार्य : दरों में कटौती से राज्यों के राजस्व में कमी आएगी। इसलिए विपक्ष शासित राज्यों ने मांग की कि कम-से-कम पांच वर्षों तक मुआवज़ा दिया जाए, जिसमें 2024-25 को आधार वर्ष माना जाए।

अतिरिक्त उपकर राज्यों को मिले : शराब, सिगरेट और लग्ज़री वस्तुओं पर 40% से ऊपर लगने वाले उपकर (Cess) की पूरी आय सीधे राज्यों को मिले। वर्तमान में केंद्र अपनी कुल आय का 17-18% विभिन्न उपकरों से पाता है, जिन्हें राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता।

शोध संस्थानों का समर्थन : जयराम रमेश ने दावा किया कि विपक्षी राज्यों की ये मांगें पूरी तरह वाजिब हैं। इन्हें केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (NIPFP) की हालिया रिसर्च का भी समर्थन मिला है।

कांग्रेस का रुख –
जीएसटी 2.0 की ज़रूरत : कांग्रेस लंबे समय से “GST 2.0” लागू करने की मांग कर रही है। इसका मकसद न केवल दरें और स्लैब कम करना है, बल्कि प्रक्रियाओं को सरल बनाना, MSMEs को राहत देना और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता को सुरक्षित करना भी है।

अगली जीएसटी काउंसिल बैठक पर निगाहें

जयराम रमेश ने कहा, “उम्मीद है कि अगले सप्ताह होने वाली जीएसटी काउंसिल बैठक सिर्फ सुर्खियाँ बटोरने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह सहकारी संघवाद की असली भावना को आगे बढ़ाएगी।”

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