पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड: नौ साल बाद निर्णय, तीन दोषी करार—लड्डन मियां समेत तीन बरी
सीबीआई अदालत का बड़ा फैसला – तीन आरोपित दोषी करार, तीन को साक्ष्य के अभाव में मिली रिहाई

मुजफ्फरपुर : नौ साल पुराने बहुचर्चित पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में शनिवार को विशेष सीबीआई अदालत ने अहम फैसला सुनाया। अदालत ने तीन आरोपितों को हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी ठहराया, जबकि तीन अन्य को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया।
विशेष सीबीआई अदालत की न्यायाधीश नमिता सिंह ने इस केस में विजय कुमार गुप्ता, रोहित कुमार सोनी और सोनू कुमार गुप्ता को दोषी करार दिया। वहीं, चर्चित चेहरा रहे अजहरूद्दीन बेग उर्फ लड्डन मियां, राजेश कुमार और रिशु कुमार जायसवाल को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण बरी कर दिया गया। अब दोषियों की सजा पर सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

अभियोजन पक्ष की दलील
सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक राकेश दूबे ने बताया कि तीन दोषियों को हत्या, हत्या की साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया गया है। उन्होंने कहा कि बरी किए गए आरोपितों के खिलाफ अपील दायर की जाएगी।
फैसले में अदालत ने साफ कहा कि पूर्व सांसद शहाबुद्दीन और लड्डन मियां के बीच किसी आपराधिक षड्यंत्र का ठोस प्रमाण नहीं मिला। इसी आधार पर उन्हें बरी कर दिया गया। 13 मई 2016 को सीवान रेलवे स्टेशन के पास वरिष्ठ पत्रकार राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अज्ञात अपराधियों के खिलाफ उनकी पत्नी आशा यादव ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

जांच के दौरान पुलिस ने सात आरोपितों की संलिप्तता पाई, जिनमें एक किशोर भी शामिल था जिसका मुकदमा अलग से चला। 15 सितंबर 2016 को केस की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में शहाबुद्दीन समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया था। हालांकि, सत्र विचारण के दौरान शहाबुद्दीन की मौत हो चुकी थी।
पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या ने उस वक्त न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश को हिला दिया था। मामले का सीधा जुड़ाव अपराध और राजनीति के गठजोड़ से जोड़ा गया था। लंबे समय से इस केस का फैसला लंबित था, जिस पर शनिवार को आंशिक विराम लगा।




