[t4b-ticker]
Advertisement
ट्रेंडिंग-न्यूज़बड़ी खबरब्रेकिंग न्यूज़मध्यप्रदेश

Dhar Bhojshala Case: हाई कोर्ट ने भोजशाला को माना मंदिर, हिंदू पक्ष पर लगाई मुहर, ASI सर्वे में मिले मंदिर के सबूत

धारDhar Bhojshala Case: मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने हालिया निर्णय में भोजशाला (Dhar Bhojshala Case) परिसर को मंदिर माना और हिंदू पक्ष के पूजा अधिकारों को मान्यता दी है।  ऐतिहासिक साक्ष्य, साहित्य, संरचनाएं और ASI की रिपोर्ट यह स्थापित करती हैं कि यह स्थान राजा भोज से जुड़ा संस्कृत अध्ययन और देवी वाग्देवी सरस्वती की आराधना प्रमुख केंद्र है।

Read More: Petrol-Diesel Ban On Bottles: पेट्रोल-डीजल बिक्री पर सख्ती, दोपहिया-चारपहिया वाहन में अब लिमिट में मिलेगा पेट्रोल, डिब्बे-बोतल में ईंधन देने पर रोक 

क्या है भोजशाला विवाद?

धार की भोजशाला एक ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर मानता है। मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है, जहां लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है।  यह विवाद कई दशकों से अदालत में चल रहा था और ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की रिपोर्ट इस मामले में अहम आधार बनी। (Dhar Bhojshala Case) बता दें कि, इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने भोजशाला परिसर को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया। वहीं ASI की 2003 की व्यवस्था के कुछ हिस्सों को निरस्त किया। ASI सर्वे रिपोर्ट पर भरोसा जताया। कोर्ट ने यह भी माना कि परिसर का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व है।

ASI सर्वे में क्या मिला? Dhar Bhojshala Case

ASI ने करीब 98 दिनों तक सर्वे किया था और अदालत में लगभग 2100 पन्नों की रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कई पुरातात्विक अवशेष, स्तंभ, मंदिर शैली की संरचनाएं और शिलालेखों का उल्लेख किया गया। हिंदू पक्ष ने कोर्ट में दावा किया कि भोजशाला परिसर में हवन कुंड, संस्कृत व्याकरण के शिलालेख, देवी-देवताओं की आकृतियां और मंदिर शैली की संरचनाएं मौजूद हैं, जो इसे मस्जिद नहीं बल्कि प्राचीन मंदिर साबित करती हैं। फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने असहमति जताई है। फैसले को देखते हुए धार शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया।

Read More:  Raipur Red Room Party: रेड रूम टेक्नो पार्टी पर पुलिस का एक्शन, हिरासत में 3 युवक, नाबालिगों के जरिए किया जा रहा था प्रचार 

11वीं सदी में राजा भोज ने कराया था निर्माण

इतिहासकारों के अनुसार, भोजशाला का निर्माण 11वीं सदी में परमार वंश के प्रसिद्ध शासक राजा भोज ने कराया था। बताया जाता है कि वर्ष 1034 ईस्वी में यहां “सरस्वती कंठाभरण महाविद्यालय” की स्थापना की गई थी, जो उस दौर में शिक्षा और संस्कृति का बड़ा केंद्र माना जाता था।मान्यता है कि परिसर में मां सरस्वती की एक अत्यंत आकर्षक और दुर्लभ प्रतिमा स्थापित थी, जिसे ज्ञान और विद्या का प्रतीक माना जाता था। लंबे समय तक यहां धार्मिक और शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होती रहीं और परिसर वेद मंत्रों की ध्वनि से गूंजता रहा।

हमलों के बाद बदली स्थिति

समय के साथ आक्रमणों और राजनीतिक बदलावों के दौर में इस ऐतिहासिक स्थल को नुकसान पहुंचा। कई हिस्से खंडहर में बदल गए और मां सरस्वती की प्रतिमा भी मलबे में दब गई। इसके बाद से ही यह स्थल विवाद का विषय बना रहा। हिंदू पक्ष इसे प्राचीन मंदिर और विद्या स्थल मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है।

Read More: Illegal Petrol-Diese: पेट्रोल-डीजल की किल्लत के बीच अवैध डीजल भंडारण पर बड़ी कार्रवाई, 620 लीटर डीजल जब्त 

कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी प्रतिक्रिया

Dhar Bhojshala Case: हाल ही में भोजशाला को लेकर आए अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि बोर्ड इस मामले पर बैठक करेगा और फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार करेगा। उन्होंने कहा कि, धार्मिक स्थल लोगों की आस्था और मानसिक शांति से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों को लगातार विवाद और कानूनी लड़ाई में बदलने से समाज में तनाव बढ़ सकता है। फैसले के बाद धार और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

Advertisement

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close