Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन इमारत हादसे पर हाई कोर्ट सख्त, मकान मालिक की गिरफ्तारी के बाद MCD को नोटिस जारी
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल हो रही दो इमारतों के ढहने की घटना पर दिल्ली हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। हादसे को लेकर दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली यूनिवर्सिटी और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए संबंधित एजेंसियों से जवाब और जरूरी जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
हादसे में 7 लोगों की मौत
सत्य निकेतन में PG के तौर पर संचालित दो इमारतें अचानक गिर गई थीं। बताया गया कि इन भवनों में करीब 50 छात्र रह रहे थे। हादसे के बाद कई छात्रों को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि कुछ लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी। घटना में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद इलाके में संचालित PG और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कुछ अंतराल के बाद इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं और इनमें निर्दोष छात्रों की जान चली जाती है। याचिकाकर्ता ने MCD की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
DU में हॉस्टल की कमी पर भी कोर्ट की नजर
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में केवल औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि अधिकारियों को गंभीर और प्रभावी तरीके से काम करना होगा। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि सत्य निकेतन में रहने वाले कई छात्र दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों में पढ़ते थे। बाहर से दिल्ली आने वाले छात्रों के लिए DU और उसके कॉलेजों में पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी PG और किराए के आवास का सहारा लेते हैं। इसी को देखते हुए हाई कोर्ट ने DU से जानकारी मांगी है कि उसके कॉलेजों में बाहर से आने वाले कितने छात्र पढ़ रहे हैं और यूनिवर्सिटी तथा कॉलेज स्तर पर कितनी हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध हैं।
PG हॉस्टलों के नियमों पर MCD से जवाब
हाई कोर्ट ने MCD से यह भी पूछा कि क्या PG के रूप में किसी भवन को संचालित करने के लिए विशेष नियम या अनुमति व्यवस्था मौजूद है। कोर्ट ने MCD को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए PG हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की संख्या से संबंधित आंकड़े भी उपलब्ध कराने को कहा है। सुनवाई के दौरान जब यह बात सामने आई कि छात्र कई बार फ्लैट किराए पर लेकर भी रहते हैं, तो कोर्ट ने सवाल किया कि प्रशासन को किस तरह पता चलता है कि कोई सामान्य आवास PG के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
गिरी इमारतों की वैधता की होगी जांच
हाई कोर्ट ने MCD के शीर्ष कार्यकारी स्तर पर जांच कराने का निर्देश दिया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि हादसे में ढही दोनों इमारतों का निर्माण वैध मंजूरी और स्वीकृत नियमों के तहत हुआ था या नहीं। यदि निर्माण बिना अनुमति के पाया जाता है, तो कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है। इसके अलावा MCD को शहर में चल रहे PG हॉस्टलों का व्यापक ऑडिट करने का निर्देश दिया गया है। इसमें यह जांच शामिल होगी कि भवनों का निर्माण स्वीकृत नक्शे, जरूरी अनुमति और लागू बिल्डिंग बायलॉज के अनुरूप हुआ है या नहीं।
‘जिम्मेदारी सिर्फ मालिक की नहीं’
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदारी केवल भवन मालिक तक सीमित नहीं की जा सकती। प्रशासनिक एजेंसियों की भी जिम्मेदारी है कि वे निर्माण नियमों का पालन सुनिश्चित करें और नियमों के उल्लंघन पर समय रहते कार्रवाई करें। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह सतर्क रहते, तो संभव है कि इस तरह की त्रासदी को रोका जा सकता था। कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, MCD और NHRC से रिपोर्ट तथा ऑडिट से जुड़ी जानकारी मांगी है। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि वह केंद्र, दिल्ली सरकार और MCD की ओर से मामले में पेश होंगे।
याचिकाकर्ता ने की 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग
PIL दाखिल करने वाले अनिकेत कुमार गुप्ता ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। इसके साथ ही याचिका में स्वतंत्र जांच कराने और सत्य निकेतन समेत आसपास के सभी PG व हॉस्टलों का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।
आरोपी मालिक राजस्थान से गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, उसे राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा गया और दिल्ली लाया जा रहा है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है। हादसे के बाद से ही पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। पुलिस ने उसके पालम विहार स्थित आवास पर भी छापा मारा था, लेकिन वह वहां नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने उसके परिचितों और संभावित सहयोगियों के ठिकानों पर भी दबिश दी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज करने के साथ लुकआउट नोटिस भी जारी किया था।
MCD के 5 अधिकारी भी सस्पेंड
हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। MCD ने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE), एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE), असिस्टेंट इंजीनियर (AE) और जूनियर इंजीनियर (JE) शामिल हैं। अब हाई कोर्ट के निर्देश के बाद PG हॉस्टलों की सुरक्षा, भवन निर्माण की मंजूरी और MCD की निगरानी व्यवस्था पर होने वाली जांच महत्वपूर्ण हो गई है। अगली सुनवाई में संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट से इस मामले में आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।




