Mahadev Betting App: सौरभ चंद्राकर को रायपुर लेकर पहुंची CBI की टीम, कल होगी कोर्ट में पेशी, 6000 करोड़ के घोटाले में होंगे बड़े खुलासे!
सौरभ चंद्राकर पर करीब 6 हजार करोड़ रुपये के कथित ऑनलाइन सट्टा घोटाले में शामिल होने का आरोप है। सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेशी के बाद अदालत ने उसे दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर CBI को सौंपने का आदेश दिया था। अब जांच एजेंसी उसे रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश करेगी।
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प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने आदेश दिया है कि आरोपी को 4 नवंबर 2026 या उससे पहले रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाए। इसके बाद प्रत्यर्पण की शर्तों और CBI की कार्रवाई को लेकर उठे कानूनी सवालों पर रायपुर की अदालत में सुनवाई होने की संभावना है।
6000 करोड़ के सट्टा घोटाले का मुख्य आरोपी है सौरभ
महादेव ऑनलाइन बुक ऐप के जरिए देशभर में कथित तौर पर अवैध सट्टेबाजी का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों ने मिलकर इस नेटवर्क को खड़ा किया था। आरोप है कि क्रिकेट, फुटबॉल, ताश सहित विभिन्न खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाने के लिए अलग-अलग वेबसाइट, प्लेटफॉर्म और पैनल बनाए गए थे। इनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को सट्टेबाजी से जोड़ा गया और करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया। CBI के अनुसार, इस नेटवर्क का संचालन विदेशों से किया जाता था। सट्टे से मिलने वाली रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई जाती थी और फिर हवाला सहित अन्य माध्यमों से विदेश भेजे जाने का आरोप है।
महादेव ऐप मामले की जांच कर रही CBI और ED
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप से जुड़े मामलों में छत्तीसगढ़ सरकार ने 13 FIR की जांच CBI को सौंपी थी। जांच एजेंसी इनमें से दो मामलों में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस पूरे नेटवर्क की मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच कर रहा है। ED ने सौरभ चंद्राकर के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल करने के साथ ही भारत और विदेशों में स्थित कई संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई भी की है। दोनों केंद्रीय एजेंसियां सट्टेबाजी से अर्जित रकम, उसके लेनदेन और कथित रूप से नेटवर्क को संरक्षण देने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले- प्रोटेक्शन मनी का होगा खुलासा
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी और भारत वापसी पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने CBI को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि आरोपी से पूछताछ के बाद इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई अहम राज सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि सट्टा नेटवर्क के जरिए कथित तौर पर दी जाने वाली प्रोटेक्शन मनी किन-किन लोगों तक पहुंचती थी, इसकी जानकारी भी जांच के दौरान सामने आ सकती है। इस बयान के बाद मामले में संभावित राजनीतिक और प्रशासनिक कनेक्शन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
प्रत्यर्पण को लेकर सौरभ के वकील ने उठाए सवाल
दिल्ली की अदालत में सुनवाई के दौरान सौरभ चंद्राकर के वकील ने उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। बचाव पक्ष ने ओमान की अदालत के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि भारत की ओर से भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध में ED से जुड़े मामले को मंजूरी मिली थी, जबकि CBI के मामले को लेकर अनुमति नहीं दी गई थी। वकील की दलील थी कि प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुसार आरोपी के खिलाफ उन्हीं मामलों में कार्रवाई की जा सकती है, जिनके आधार पर उसे भारत लाया गया है। ऐसे में CBI द्वारा उसे अपने मामले में रिमांड पर लेना प्रत्यर्पण की शर्तों के विपरीत हो सकता है।
CBI ने कहा- कानूनी पहलुओं पर रायपुर कोर्ट करेगी फैसला
वहीं, CBI ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि सौरभ चंद्राकर के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत पहले ही गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी थी। एजेंसी के अनुसार, ओमान से मिली जानकारी और संबंधित प्रक्रियाओं के आधार पर उसे भारत लाया गया है।
CBI ने यह भी कहा कि ED और CBI की जांच में कई तथ्य आपस में जुड़े हुए हैं। दिल्ली की अदालत के सामने फिलहाल आरोपी को रायपुर तक लाने के लिए ट्रांजिट रिमांड का सवाल था। प्रत्यर्पण की शर्तों और संबंधित मामले में मुकदमा चलाने के अधिकार पर अंतिम निर्णय रायपुर की विशेष अदालत करेगी।
116 दिन तक ओमान में रहा हिरासत में
जांच एजेंसियों के मुताबिक, महादेव सट्टा ऐप मामले में जांच शुरू होने के बाद से ही सौरभ चंद्राकर फरार चल रहा था। वह वर्ष 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। बताया गया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और UAE से ओमान पहुंच गया। जांच के दौरान उसके पास एक कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट होने की जानकारी भी सामने आई थी। इसमें उसकी तस्वीर थी, लेकिन नाम अलग दर्ज बताया गया।
खुफिया जानकारी और इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर 8 जुलाई 2026 को ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद भारत सरकार की ओर से प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई। CBI, ED, इंटरपोल और ओमान के अधिकारियों के बीच समन्वय के बाद उसे भारत लाने का रास्ता साफ हुआ। 1 नवंबर को CBI की टीम उसे मस्कट से भारत लेकर पहुंची।
ओमान में सौरभ ने जताई थी जान को खतरे की आशंका
भारत प्रत्यर्पित किए जाने से पहले सौरभ चंद्राकर ने ओमान में हिरासत के दौरान अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। उसने आशंका व्यक्त की थी कि भारत की जेल में उसकी जान को खतरा हो सकता है। उसने अपने परिवार की सुरक्षा की मांग करते हुए दावा किया था कि महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोग उसे और उसके परिजनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उसने जांच एजेंसियों के सामने बिना किसी दबाव के अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग भी की थी।
नेटवर्क के राजनीतिक कनेक्शन और विदेशों में संपत्तियों की जानकारी देने का दावा
सौरभ चंद्राकर ने कथित तौर पर ओमान में भारतीय जांच एजेंसियों को महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े राजनीतिक संपर्कों, पैसों के लेनदेन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों के संबंध में जानकारी देने की इच्छा जताई थी। उसने भारत आने के बाद जांच एजेंसियों और अदालत के सामने बयान देने की बात कही थी। हालांकि, इन दावों और संभावित खुलासों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
रकम ट्रांसफर करने का आरोप
CBI की जांच में आरोप लगाया गया है कि सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों के जरिए अलग-अलग हिस्सों में ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद कथित तौर पर हवाला नेटवर्क के माध्यम से पैसा विदेश पहुंचाया जाता था। जांच एजेंसी को यह भी संदेह है कि सट्टेबाजी के कारोबार को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए कुछ सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दी जाती थी। इसी पहलू को लेकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है। CBI ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम से संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है। वहीं ED इस नेटवर्क से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
अब आगे क्या होगा?
Mahadev Betting App: सौरभ चंद्राकर को कल यानी 4 नवंबर 2026 तक रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाना है। इसके बाद अदालत में उसकी रिमांड और प्रत्यर्पण से जुड़ी कानूनी शर्तों पर विचार हो सकता है। CBI उससे महादेव ऐप के संचालन, सट्टे की रकम के लेनदेन, विदेशों में मौजूद नेटवर्क और कथित प्रोटेक्शन मनी को लेकर पूछताछ कर सकती है। आगे चलकर ED भी अपने मामले में उससे पूछताछ के लिए कानूनी प्रक्रिया अपना सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सौरभ चंद्राकर की पूछताछ में महादेव सट्टा ऐप के पीछे छिपे लोगों, कथित राजनीतिक संपर्कों और करोड़ों रुपये के लेनदेन को लेकर कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं।




