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BRICS Summit 2026: PM मोदी ने पुतिन को भेंट किया ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद, भारत-रूस सांस्कृतिक रिश्तों पर जोर

नई दिल्ली। BRICS Summit 2026: BRICS सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत मंडपम में मुलाकात हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति को तमिल साहित्य की प्रसिद्ध कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण उपहार के रूप में भेंट किया।

पुस्तक सौंपते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को तिरुक्कुरल की विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह महान कृति भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है और इसका रूसी अनुवाद दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क तथा सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने में मददगार हो सकता है।

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मानव जीवन के मूल्यों पर आधारित है तिरुक्कुरल

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि संत और कवि तिरुवल्लुवर ने तिरुक्कुरल में मानव जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं और मूल्यों को बेहद गहराई से प्रस्तुत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रूसी भाषा में इसका अनुवाद भारत और रूस के बीच साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संवाद को आगे बढ़ाएगा। तिरुक्कुरल को तमिल साहित्य की कालजयी रचनाओं में गिना जाता है। इसे कई बार ‘तमिल वेद’ के रूप में भी संदर्भित किया जाता है। इस प्राचीन कृति का दुनिया की अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

133 अध्यायों में हैं 1,330 दोहे

तिरुक्कुरल को कवि-दार्शनिक तिरुवल्लुवर की महान रचना माना जाता है। इसमें कुल 133 अध्याय और 1,330 दोहे हैं। इसमें नैतिकता, जीवन मूल्यों, सामाजिक आचरण और मानव व्यवहार से जुड़े विषयों को संक्षिप्त लेकिन गहरे अर्थ के साथ प्रस्तुत किया गया है। तमिल समाज में तिरुवल्लुवर को संत, कवि और दार्शनिक के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने कई सार्वजनिक संबोधनों में तिरुवल्लुवर और उनकी शिक्षाओं का उल्लेख कर चुके हैं।

तमिल संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रतीक

तिरुक्कुरल को तमिल संस्कृति और साहित्य की महत्वपूर्ण पहचान माना जाता है। तमिलनाडु में इसे शैक्षणिक स्तर पर भी पढ़ाया जाता है और लोगों के बीच इसे विशेष सम्मान प्राप्त है। कन्याकुमारी में स्थापित तिरुवल्लुवर की विशाल प्रतिमा भी उनके प्रति सम्मान और तमिल साहित्य में उनके योगदान का प्रतीक है। महात्मा गांधी और लियो टॉल्स्टॉय जैसे प्रसिद्ध व्यक्तित्वों द्वारा भी तिरुक्कुरल की प्रशंसा किए जाने का उल्लेख मिलता है।

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रूस से भी जुड़ा है तिरुक्कुरल का साहित्यिक संबंध

BRICS Summit 2026: भारत के प्राचीन दर्शन और साहित्य में रूस की रुचि काफी पुरानी रही है। यूरोपीय भाषाओं में हुए अनुवादों के जरिए तिरुक्कुरल की पहुंच रूसी विद्वानों और साहित्यिक जगत तक भी हुई। बताया जाता है कि रूसी साहित्य के महान लेखक लियो टॉल्स्टॉय ने 19वीं सदी में इसके शुरुआती अनुवादों के माध्यम से तिरुक्कुरल के विचारों से परिचय प्राप्त किया था। नैतिकता, करुणा और अहिंसा जैसे मूल्यों पर तिरुक्कुरल के जोर को उनके विचारों से भी जोड़ा जाता है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी संस्करण भेंट करना भारत और रूस के बीच राजनीतिक रिश्तों के साथ-साथ सांस्कृतिक और जन-स्तरीय संबंधों को महत्व देने का संदेश भी माना जा रहा है।
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