
छत्तीसगढ़ में 2018 का एक ऐसा मामला फिर से चर्चा में हैं, जिसने सबको हैरान करके रख दिया है, यहाँ एक मृतक शव के साथ यौन संबंध का मामला है, जिस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की तरफ से एक मामले में सुनवाई के दौरान ये कहा गया कि मृतक के शव के साथ यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं है। छत्तीसगढ़ HC ने कहा है कि शव के साथ यौन संबंध बनाना (नेक्रोफीलिया) सबसे जघन्य अपराधों में से एक है, लेकिन यह भारतीय दंड संहिता (IPC) या यौन अपराधों से बच्चों की रोकथाम (POCSO) अधिनियम के तहत दंडनीय ‘बलात्कार’ के अपराध की कैटेगरी में नहीं आता।
जस्टिस न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की बेंच ने टिप्पणी की है कि बलात्कार के अपराध के लिए पीड़िता का जीवित होना जरूरी है। छत्तीसगढ़ HC कोर्ट ने इस मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट की ओर से रंगराजू बनाम कर्नाटक राज्य (2023) के मामले में दिए गए फैसले का जिक्र करते हुए कहा “भारतीय कानून शव के साथ यौन संबंध को “बलात्कार” नहीं मानते और IPC की धारा 376 के तहत अभियुक्त को दोषी ठहराने के लिए इसे उपयुक्त मानदंड नहीं मानते।”
कोर्ट के सामने सुनवाई में जो मामले में आया है उसमें आरोपी नितिन यादव ने 9 साल की एक बच्ची का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया और उसकी हत्या कर दी। बात यहीं खत्म नहीं होती, हत्या करने के बाद आरोपी ने पीड़िता के शव को एक पहाड़ी पर ले जाकर उसके साथ नेक्रोफीलिया को अंजाम देता है और आखिरकार उसी पहाड़ी पर उसे दफना दिया गया। इस काम में आरोपी नितिन की मदद सह-आरोपी नीलकंठ उर्फ नीलू नागेश करता है।
इस मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने मुख्य आरोपी नितिन यादव को दुष्कर्म और हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, नीलकंठ को साक्ष्य छिपाने के आरोप में ट्रायल कोर्ट ने 7 साल कैद की सजा सुनाई।
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