INDIA Bloc Mahabhiyog : मॉक सांसद में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का ‘महाभियोग’, खड़गे ने कहा-‘सत्ता हथियाने रची गई साजिश’
नई दिल्ली। INDIA Bloc Mahabhiyog : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच जारी विवाद अब नए रूप में सामने आया है। INDIA ब्लॉक में शामिल विपक्षी दलों ने नई दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक सार्वजनिक ‘इम्पीचमेंट’ कार्यक्रम आयोजित किया। इस आयोजन में करीब 21 विपक्षी दलों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित किया गया, जहां संसद की कार्यवाही की तर्ज पर पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई गई।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रस्ताव पेश किया। आयोजन में विभिन्न विपक्षी दलों के करीब 30 नेताओं के संबोधित करने की उम्मीद जताई गई। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कार्यक्रम के अंत में अपनी बात रखने की बात कही गई।
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खड़गे का आरोप- सरकार के इशारे पर काम कर रहा चुनाव आयोग
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के प्रतीकात्मक सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम में, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “2014 से, सत्ता हथियाने और उसे बनाए रखने के लिए हर मुमकिन साजिश रची गई है। इन्होंने सांसदों को चुराया है, राजनीतिक दलों को तोड़ा है, सरकारों को गिराया है, और इलेक्टोरल बॉन्ड, ED तथा CBI का इस्तेमाल किया है; और अब ये वोट चुरा रहे हैं। हमारे पास वोटों की ऐसी चोरी के सैकड़ों उदाहरण हैं। ज्ञानेश कुमार इस चोरी को इसलिए अंजाम दे पा रहे हैं क्योंकि ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ मौजूद है। यह कानून दिसंबर 2023 में विपक्ष के 145 सांसदों को निलंबित करके पारित किया गया था। यह शर्मनाक और अपमानजनक है। यह कानून चुनाव आयुक्तों को जीवन भर के लिए एक सुरक्षा कवच देता है—एक ऐसा सुरक्षा कवच जो भारत के राष्ट्रपति या भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी हासिल नहीं है…”
193 सांसदों के प्रस्ताव का भी किया जिक्र
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संबोधन में दावा किया कि करीब सात महीने पहले विपक्ष के 193 सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव से संबंधित नोटिस दिए थे। उनके मुताबिक, इन नोटिसों को स्वीकार नहीं किया गया।खड़गे ने कहा कि मौजूदा विरोध को इसी पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की मांग चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर है और वह चाहता है कि संस्था संविधान में निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप काम करे।
मतदाता सूची और वोटिंग अधिकारों को लेकर उठाए सवाल
INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर भी चिंता जताई। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। खड़गे ने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम अनुचित तरीके से सूची से न हटाया जाए। उन्होंने खास तौर पर कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के मतदान अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया निष्पक्ष और जवाबदेह होनी चाहिए, ताकि किसी भी नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के विरोध का एक प्रमुख मुद्दा उनका इस्तीफा है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटने की मांग कर रहे हैं।
प्रतीकात्मक सार्वजनिक ‘इम्पीचमेंट’ कार्यक्रम को विपक्ष ने अपनी असहमति दर्ज कराने के एक तरीके के रूप में प्रस्तुत किया। यह आयोजन संसद की कार्यवाही की शैली में किया गया, लेकिन इसे वास्तविक संवैधानिक पद से हटाने की संसदीय प्रक्रिया से अलग समझना जरूरी है।
रामलीला मैदान की रैली से पहले विपक्ष की तैयारी
इस कार्यक्रम को 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली INDIA ब्लॉक की रैली से पहले एक अहम आयोजन के तौर पर देखा जा रहा है। बताया गया है कि कार्यक्रम पहले शुक्रवार को आयोजित होना था, लेकिन दिल्ली में भारी बारिश के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब विपक्षी दलों की नजर आगामी रैली पर है, जहां मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की जवाबदेही जैसे मुद्दे उठाए जाने की संभावना है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बहस तेज
INDIA Bloc Mahabhiyog : मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के इस कार्यक्रम ने चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। विपक्ष जहां संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, वहीं इन आरोपों और दावों का मूल्यांकन संबंधित तथ्यों तथा आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना जरूरी है।




