Analogue Paneer: त्योहारों से पहले एनालॉग पनीर को लेकर बढ़ी सख्ती, देशभर में बैन पर होगी अहम बैठक
नई दिल्ली। Analogue Paneer: त्योहारों के सीजन से पहले पनीर की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा नियामक की निगरानी तेज हो गई है। एनालॉग पनीर को लेकर कई राज्यों में कार्रवाई के बाद अब इसके देशभर में इस्तेमाल और बिक्री पर रोक लगाने की संभावना पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, 17 सितंबर 2026 तक पूरे देश में इस उत्पाद पर कोई राष्ट्रीय प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है। FSSAI के सीईओ राजित पुन्हानी के मुताबिक, 24 सितंबर को सभी राज्यों के साथ बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और राज्यों की सहमति मिलने पर देशव्यापी रोक का फैसला किया जा सकता है।
कई राज्यों में पहले ही हो चुकी है कार्रवाई
FSSAI के अनुसार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक समेत कई राज्यों ने एनालॉग पनीर के खिलाफ कदम उठाए हैं। FSSAI प्रमुख ने बताया कि करीब आठ राज्यों में इसके खिलाफ प्रतिबंध लगाया जा चुका है। अब केंद्रीय स्तर पर एक समान व्यवस्था बनाने की दिशा में विचार किया जा रहा है।
24 सितंबर की बैठक पर टिकी नजर
FSSAI प्रमुख राजित पुन्हानी ने बताया है कि 24 सितंबर को राज्यों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें राज्यों से प्रतिक्रिया और सुझाव लिए जाएंगे। उनका कहना है कि अगर सभी राज्यों के बीच सहमति बनती है, तो एनालॉग पनीर पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। फिलहाल अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
क्या है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद है जो देखने और कई खाद्य व्यंजनों में इस्तेमाल के लिहाज से पारंपरिक पनीर जैसा हो सकता है, लेकिन इसकी संरचना अलग होती है। FSSAI के अनुसार, इसमें दूध के स्थान पर या दूध के कुछ घटकों की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके विपरीत FSSAI के मानकों में पनीर को दूध या मिल्क सॉलिड्स से प्राप्त उत्पाद के रूप में परिभाषित किया गया है।
‘पनीर’ के नाम पर बेचना बना नियमों का मुद्दा
FSSAI की ओर से 2026 में जारी सार्वजनिक निर्देशों में कहा गया है कि चीज एनालॉग को ‘पनीर’ के नाम से बेचना नियमों का उल्लंघन है। ऐसे उत्पादों के लिए सही और स्पष्ट नामकरण जरूरी है, ताकि उपभोक्ता को यह पता रहे कि उसे दूध से बना उत्पाद मिल रहा है या कोई एनालॉग विकल्प। FSSAI के प्रस्तावित नियमों में यह भी कहा गया है कि यदि किसी होटल, रेस्तरां या कैटरिंग संस्थान की डिश में डेयरी एनालॉग का इस्तेमाल किया जाता है, तो मेन्यू या संबंधित जानकारी में ‘Non-dairy’ या ‘Analogue’ जैसे शब्दों से इसकी प्रकृति स्पष्ट की जानी चाहिए।
होटल और रेस्टोरेंट पर बढ़ सकती है जिम्मेदारी
देशव्यापी प्रतिबंध लागू होने की स्थिति में होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग कंपनियों और अन्य फूड बिजनेस को अपने कच्चे माल के स्रोत और लेबलिंग की जांच करनी पड़ सकती है। खासतौर पर उन प्रतिष्ठानों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा जो पनीर आधारित व्यंजन बड़ी मात्रा में तैयार करते हैं। उन्हें सप्लायर से मिलने वाले उत्पाद की प्रकृति और पैकेजिंग संबंधी जानकारी की जांच करनी होगी। इसके साथ ही ग्राहक को सही जानकारी देने के लिए मेन्यू और डिस्प्ले में इस्तेमाल किए जा रहे डेयरी उत्पाद का सही उल्लेख करना भी जरूरी हो सकता है।
उपभोक्ता कैसे पहचानें अंतर?
पैक्ड पनीर खरीदते समय ग्राहक को पैकेट पर लिखे ingredients और product name को ध्यान से पढ़ना चाहिए। यदि उसमें ‘Analogue’, ‘Non-dairy’ या दूध के बजाय वनस्पति फैट/तेल से जुड़े घटकों का उल्लेख है, तो उसे पारंपरिक दूध वाले पनीर के समान नहीं माना जाना चाहिए। खुले में बिकने वाले उत्पादों के मामले में पैकेजिंग और स्रोत की जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण उपभोक्ताओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
FSSAI की निगरानी के बीच बढ़ी चर्चा
एनालॉग पनीर पर कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब FSSAI और राज्य खाद्य सुरक्षा विभागों ने रेस्टोरेंट और खाद्य कारोबारियों की जांच तेज की है। FSSAI प्रमुख ने हाल की कार्रवाई के बारे में बताया कि बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए गए हैं और कई खाद्य लाइसेंस निलंबित भी किए गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर निरीक्षण में नियमों का उल्लंघन नहीं मिलता और मीडिया में मुख्य रूप से उल्लंघन वाले मामले ही सामने आते हैं।
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देशव्यापी बैन पर अभी अंतिम फैसला बाकी
Analogue Paneer: फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एनालॉग पनीर पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध अभी प्रस्तावित चरण में है। 24 सितंबर की राज्यों के साथ बैठक के बाद इसके आगे के नियामकीय कदमों की तस्वीर साफ हो सकती है। तब तक मौजूदा राज्य-स्तरीय नियम और FSSAI के लेबलिंग संबंधी निर्देश लागू रहेंगे। त्योहारी सीजन को देखते हुए पनीर खरीदते समय पैकेट का लेबल, सामग्री और उत्पाद का सही नाम देखना उपभोक्ताओं के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण रहेगा।




