Onion Price Hike: महंगी प्याज ने बिगाड़ा किचन बजट, कुछ ही दिनों में करीब 94 फीसदी तक की बढ़ोतरी
नई दिल्ली। Onion Price Hike: देश के कई हिस्सों में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में कई जगह प्याज ₹60 से ₹70 प्रति किलो तक बिकने की बात सामने आ रही है, जबकि केंद्र सरकार अपने बफर स्टॉक से चयनित बिक्री केंद्रों और मोबाइल वैन के जरिए प्याज ₹35 प्रति किलो की दर पर उपलब्ध करा रही है। इसके चलते सरकारी बिक्री और खुले बाजार के भाव के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
एक साल में तेजी से बढ़े प्याज के दाम
आपके दिए आंकड़ों के मुताबिक, 16 सितंबर 2026 को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव ₹53.84 प्रति किलो रहा, जबकि पिछले साल इसी तारीख को यह ₹27.71 प्रति किलो था। इस हिसाब से कीमत में करीब 94 फीसदी की बढ़ोतरी बैठती है। इसी दिन औसत थोक भाव ₹45.65 प्रति किलो बताया गया है। हालांकि, बाजार की कीमतें शहर और तारीख के अनुसार बदलती रहती हैं। हालिया सरकारी और समाचार रिपोर्टों में भी अगस्त-सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।
24 अगस्त से बफर स्टॉक बाजार में उतारा गया
कीमतों में उछाल के बीच केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 से मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) के तहत रखे प्याज के बफर स्टॉक को बाजार में उतारना शुरू किया। NCCF और NAFED के अलावा केंद्रीय भंडार तथा मोबाइल बिक्री केंद्रों के जरिए उपभोक्ताओं तक प्याज पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य उन बाजारों में सप्लाई बढ़ाना है जहां कीमतों पर ज्यादा दबाव है।
19 शहरों तक पहुंची सरकारी सप्लाई
केंद्र ने बफर प्याज की बिक्री और परिवहन का दायरा बढ़ाकर 19 शहरों तक किया है। इसके लिए रेल और सड़क, दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘कांदा एक्सप्रेस’ के अलावा 30 से ज्यादा ट्रकों के जरिए उत्पादक इलाकों से बड़े खपत केंद्रों तक स्टॉक पहुंचाया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, बाजार की स्थिति को देखते हुए बफर स्टॉक की मात्रा और वितरण केंद्रों का दायरा आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
सरकारी कीमत हर जगह क्यों नहीं मिल रही?
बफर स्टॉक से प्याज ₹35 किलो में उपलब्ध कराने के बावजूद यह कीमत देश के हर बाजार में लागू खुदरा दर नहीं है। सरकारी बिक्री चुनिंदा आउटलेट और मोबाइल वैन के माध्यम से की जा रही है। ऐसे में जहां उपभोक्ताओं को सरकारी वितरण केंद्र उपलब्ध नहीं होते, वहां उन्हें स्थानीय बाजार के भाव पर प्याज खरीदनी पड़ सकती है। यही कारण है कि सरकारी और खुले बाजार की कीमत में अंतर बना हुआ है।
मौसमी बदलाव भी जिम्मेदार
प्याज की कीमतों में अगस्त से दिसंबर के बीच मौसमी दबाव देखने को मिलता है। रबी फसल का स्टॉक कम होने लगता है और नई खरीफ फसल की आवक पूरी तरह बढ़ने में समय लगता है। इस अंतराल को प्याज के ‘लीन पीरियड’ के तौर पर देखा जाता है। ऐसे समय में बफर स्टॉक से अतिरिक्त आपूर्ति बाजार में भेजने की रणनीति अपनाई जाती है।
खरीफ प्याज की बुआई में देरी का असर
सरकार ने जुलाई में बताया था कि महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में खरीफ प्याज की बुआई करीब 15 दिन पीछे चल रही थी। वहीं कर्नाटक के चित्रदुर्ग और चल्लाकेरे क्षेत्र में बुआई सामान्य स्तर की लगभग 60 फीसदी रहने का अनुमान था। ऐसी स्थिति में नई फसल की मंडी में आवक प्रभावित हो सकती है और मौजूदा स्टॉक पर दबाव बढ़ सकता है।
मौसम और बाजार की गतिविधियां भी बनी वजह
केंद्र सरकार ने प्याज की स्थिति पर जारी जानकारी में मॉनसून की देरी और कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश का भी उल्लेख किया है। सरकार के अनुसार, इन परिस्थितियों के बीच कुछ कारोबारियों की सट्टा खरीदारी से बाजार की धारणा प्रभावित हुई। हालांकि, इन कारणों का असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग स्तर पर हो सकता है।
देश में उत्पादन पर्याप्त, फिर भी सप्लाई का सवाल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में प्याज उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के 307.67 लाख मीट्रिक टन के करीब है। सरकार ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में स्टॉक को पर्याप्त बताया था। इसका मतलब यह है कि मौजूदा चुनौती सिर्फ कुल उत्पादन की नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में स्टॉक की उपलब्धता, परिवहन और समय पर बाजार तक पहुंच से भी जुड़ी है।
2026-27 के लिए 2 लाख टन बफर खरीद का लक्ष्य
केंद्र ने 2026-27 के लिए मूल्य स्थिरीकरण बफर के तहत 2 लाख टन रबी प्याज खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार करीब 1.21 लाख टन प्याज की खरीद की जा चुकी थी। वहीं किसानों से बफर के लिए प्याज खरीदने की दर जुलाई 2026 में ₹1,875 से बढ़ाकर ₹2,125 प्रति क्विंटल कर दी गई, यानी करीब ₹21.25 प्रति किलो।
आगे क्या रहेगा सरकार का फोकस?
Onion Price Hike: प्याज की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार की रणनीति फिलहाल तीन प्रमुख स्तरों पर दिखाई देती है—बफर स्टॉक से नियंत्रित मात्रा में बिक्री, उत्पादक राज्यों से बड़े खपत केंद्रों तक तेज परिवहन और बाजार की स्थिति के अनुसार सप्लाई का विस्तार। सरकार ने कहा है कि इस हस्तक्षेप का उद्देश्य मौसमी कीमतों के दबाव को कम करना और उपभोक्ताओं के लिए उपलब्धता बनाए रखना है। आम उपभोक्ताओं के लिए राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकारी दर वाली प्याज कितने व्यापक स्तर पर उपलब्ध होती है और नई खरीफ फसल की आवक बाजार में किस गति से बढ़ती है।




