
रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने अपने खिलाफ दर्ज FIR और फरार होने की खबरों पर सोशल मीडिया के जरिए सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह 9 नवंबर को छत्तीसगढ़ लौटने के बाद थाने में उपस्थित होकर पुलिस जांच में पूरा सहयोग करेंगे। अमित जोगी ने कहा कि उन्हें देश की न्यायिक प्रक्रिया और संविधान पर अटूट भरोसा है। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को राजनीतिक व्यंग्य से जोड़ते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बताया।
पार्टी की ओर से भी अमित जोगी के फरार होने की खबरों को भ्रामक बताया गया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश संगठन महामंत्री निलेश चौहान ने थाना प्रभारी से मुलाकात कर अमित जोगी की ओर से ईमेल के माध्यम से भेजा गया जवाब और उनका पक्ष पुलिस के सामने रखा। पार्टी के मुताबिक, अमित जोगी 2 से 8 नवंबर तक पहले से निर्धारित निजी कार्यक्रम के चलते प्रदेश से बाहर हैं। वह 9 नवंबर को वापस लौटने के बाद खुद थाने पहुंचेंगे।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सांकेतिक रूप से शादी और हनीमून के दृश्यों में दिखाया गया था। इस वीडियो पर भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताते हुए इसे प्रधानमंत्री और संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का अपमान बताया। इसके बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रायपुर के सिविल लाइंस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
भाजपा विधायक राजेश मूणत ने वीडियो की पटकथा लिखने वालों, इसे बनाने वाले कैमरामैन और इसमें भूमिका निभाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 352, 353(2), 356(2) और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू की है।
इसके बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने लिखा, “बेशक मैं उपस्थित होऊंगा और बेशक मैं सहयोग करूंगा। एक नागरिक और वकील के रूप में मुझे इस देश की न्यायिक प्रक्रिया पर अटूट भरोसा है।” उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यंग्य और सांप्रदायिक विद्वेष के बीच अंतर समझना जरूरी है। उनके मुताबिक, सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के कामकाज पर व्यंग्य करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत आता है।
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FIR में लगाई गई धाराओं पर भी उठाए सवाल
अमित जोगी ने अपने बयान में FIR में लगाई गई धाराओं पर कानूनी सवाल उठाए। उन्होंने धारा 196 BNS के तहत सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने के आरोप पर सवाल करते हुए पूछा कि वीडियो में किस धर्म, जाति या समुदाय का उल्लेख किया गया है। वहीं, धारा 352, 353(2), 356(2) BNS और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत लगाए गए आरोपों को भी उन्होंने चुनौती दी। उनका दावा है कि वीडियो राजनीतिक व्यंग्य था, न कि किसी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने या अश्लीलता का प्रयास।
भाजपा नेताओं पर भी साधा निशाना
अपने बयान में अमित जोगी ने भाजपा नेताओं पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की मूर्ति चोरी होने, झीरम घाटी हमले को लेकर उन पर लगाए गए आरोपों और अंतागढ़ मामले का जिक्र करते हुए सवाल किया कि इन मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है।
अमित जोगी ने कहा कि वह पीड़ित होने का कार्ड नहीं खेलना चाहते, लेकिन एकतरफा कानून लागू किए जाने के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने दोहराया कि वह 8 नवंबर को वापस आएंगे और 9 नवंबर को थाने में उपस्थित होकर पुलिस के सवालों का जवाब देंगे।
फिलहाल इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। अब सबकी नजर 9 नवंबर पर है, जब अमित जोगी थाने पहुंचकर अपना बयान दर्ज कराएंगे।




