Cyclone Murasu: अर्नब के बाद अब चक्रवात मुरासु की दस्तक, आंध्र प्रदेश समेत इन राज्यों में बारिश की संभावना, जानें कितना खतरनाक हो सकता है
नई दिल्ली। Cyclone Murasu: बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर मौसमी गतिविधियां तेज होने की खबरों के बीच तटीय इलाकों में सतर्कता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। ‘अर्नब’ के बाद साइक्लोन ‘मुरासु’ ने दस्तक दे दी है। समुद्र में बने गहरे दबाव के क्षेत्र के चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका के मद्देनजर मौसम पर नजर रखी जा रही है। संभावित तूफान का असर आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों सहित दक्षिण भारत के कई हिस्सों में देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
चक्रवात मुरासु को लेकर क्या है चिंता?
मौसम प्रणाली के मजबूत होने की स्थिति में तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं चलने और कई इलाकों में भारी बारिश होने का खतरा पैदा हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में समुद्र में ऊंची लहरें उठने के साथ निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी गंभीर हो सकती है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है। मछुआरों के लिए भी समुद्र की स्थिति को देखते हुए विशेष सतर्कता जरूरी है।
100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक हो सकती है हवा की रफ्तार
दी गई जानकारी के मुताबिक, संभावित तूफान के प्रभाव से हवा की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। कुछ परिस्थितियों में हवा के झोंके इससे भी तेज होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, किसी भी चक्रवात की वास्तविक ताकत और उसके संभावित प्रभाव का आकलन मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के आधार पर ही किया जाना चाहिए। हवा की गति के अलावा तूफान की दिशा, समुद्र की स्थिति और बारिश की मात्रा भी नुकसान की गंभीरता तय करती है।
आंध्र प्रदेश समेत दक्षिण भारत में बारिश की आशंका
मौसम में संभावित बदलाव के कारण तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। इसके अलावा तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल और माहे में भी वर्षा की संभावना पर नजर रखी जा रही है। यदि सिस्टम अधिक मजबूत होता है, तो कुछ क्षेत्रों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की स्थिति बन सकती है। इससे निचले इलाकों में पानी भरने, सड़कों पर यातायात प्रभावित होने और सामान्य जनजीवन बाधित होने की आशंका रहेगी।
बाढ़ और जलभराव का भी खतरा
चक्रवाती सिस्टम के साथ होने वाली लगातार बारिश कई बार तेज हवाओं से भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। कम समय में बड़ी मात्रा में बारिश होने पर निचले इलाकों में पानी जमा हो सकता है। नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने का जोखिम भी रहता है। ऐसे में प्रशासन के लिए जलनिकासी, राहत एवं बचाव व्यवस्था और संवेदनशील इलाकों पर निगरानी बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
इन जिलों में विशेष सतर्कता की जरूरत
दी गई जानकारी में आंध्र प्रदेश के कृष्णा, गुंटूर, बापटला, प्रकाशम और नेल्लोर जिलों को संभावित रूप से संवेदनशील बताया गया है। हालांकि, इन जिलों में रेड अलर्ट जारी होने के दावे की पुष्टि आधिकारिक मौसम बुलेटिन से करना आवश्यक है। तूफान की दिशा और तीव्रता में बदलाव के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की सूची भी बदल सकती है। इसलिए लोगों को केवल अपुष्ट खबरों पर निर्भर रहने के बजाय मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए।
उत्तर भारत के मौसम पर भी पड़ सकता है असर
Cyclone Murasu: दक्षिण भारत में सक्रिय मौसमी सिस्टम के व्यापक प्रभावों को लेकर उत्तर भारत के मौसम में संभावित बदलाव की चर्चा भी की जा रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में बारिश की संभावना संबंधी पूर्वानुमान की पुष्टि संबंधित राज्यों के लिए जारी मौसम विभाग के बुलेटिन से की जानी चाहिए।



