CG Politics: तारा कोल ब्लॉक मामले पर गरमाई सियासत, भूपेश बघेल ने दी CM साय को बहस की खुली चुनौती
रायपुर। CG Politics: हसदेव अरण्य क्षेत्र के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अंबिकापुर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस की चुनौती दी है। बघेल ने कहा कि खदानों के आवंटन और नीलामी को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप का जवाब दस्तावेजों के आधार पर खुली चर्चा में दिया जाना चाहिए।
बघेल का दावा- कांग्रेस सरकार ने खदानों को नीलामी से बाहर रखने भेजा था प्रस्ताव
कांग्रेस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे भूपेश बघेल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके मुख्यमंत्री रहते हसदेव क्षेत्र की 9 कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने के लिए केंद्र सरकार को पत्र भेजा गया था। उन्होंने कहा कि हसदेव अरण्य घने जंगल और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए यहां अतिरिक्त कोयला खनन को लेकर उनकी सरकार ने आपत्ति जताई थी। बघेल के मुताबिक, उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय कोयला मंत्री से भी मुलाकात कर हसदेव क्षेत्र की स्थिति बताई थी। उनका कहना है कि इस इलाके का संबंध जलग्रहण क्षेत्र, सिंचाई और स्थानीय आदिवासी आबादी से है, इसलिए खनन के संभावित प्रभावों पर विचार किया जाना चाहिए।
विधानसभा के प्रस्ताव का भी दिया हवाला
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए कहा कि हसदेव क्षेत्र में नई खदानों को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पारित हुआ था। कांग्रेस का कहना है कि इसके बावजूद तारा कोल ब्लॉक को बाद में नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया गया। इसी मुद्दे पर बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने आमने-सामने बहस का प्रस्ताव रखा। उनका कहना है कि दोनों पक्ष दस्तावेज सामने रखकर यह स्पष्ट कर सकते हैं कि तारा कोल ब्लॉक को नीलामी प्रक्रिया में शामिल करने से पहले और बाद में किस स्तर पर क्या निर्णय लिए गए।
केंद्र का स्पष्टीकरण- दिसंबर 2025 में राज्य ने शामिल करने का अनुरोध किया
तारा कोल ब्लॉक को लेकर केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने 11 सितंबर 2026 को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि 2023 में छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध के बाद तारा ब्लॉक को व्यावसायिक कोयला खदानों की नीलामी से बाहर किया गया था। मंत्रालय के अनुसार, हसदेव अरण्य क्षेत्र में लेमरू एलीफेंट कॉरिडोर से ओवरलैप वाले ब्लॉकों को बाद की नीलामी प्रक्रिया में भी नहीं रखा गया।
मंत्रालय के मुताबिक, 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से तारा कोल ब्लॉक को आगामी नीलामी में शामिल करने का अनुरोध किया गया। केंद्र के अनुसार, राज्य ने अपने पत्र में बताया था कि तारा ब्लॉक लेमरू एलीफेंट कॉरिडोर से बाहर है और इसे आगामी नीलामी में रखा जा सकता है। इसके बाद ब्लॉक की सीमा में संशोधन कर उसे नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया गया।
2023 और 2025 के पत्रों को लेकर बढ़ा विवाद
तारा कोल ब्लॉक विवाद का मुख्य केंद्र अब 2023 और 2025 में राज्य सरकार की ओर से भेजे गए पत्र बताए जा रहे हैं। कांग्रेस 2023 के उस रुख का हवाला दे रही है, जिसमें हसदेव क्षेत्र के कई कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने की मांग की गई थी। दूसरी ओर, केंद्रीय कोयला मंत्रालय 11 दिसंबर 2025 के पत्र को सामने रखते हुए कह रहा है कि इसी अनुरोध के बाद तारा ब्लॉक को दोबारा नीलामी में शामिल किया गया।
दीपक बैज बोले- जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर आंदोलन
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज ने भी तारा कोल ब्लॉक के मुद्दे पर सरकार को घेरने की बात कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हसदेव और प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन करेगी। बैज के मुताबिक, कांग्रेस नेता राहुल गांधी छत्तीसगढ़ में जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन की शुरुआत करेंगे। उन्होंने सरगुजा और बस्तर में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात कही।
हसदेव अरण्य में खनन को लेकर पुराना विवाद
CG Politics: हसदेव अरण्य में कोयला खनन लंबे समय से राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस का विषय रहा है। हालिया तारा कोल ब्लॉक नीलामी के बाद कांग्रेस के साथ पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों से जुड़े समूहों ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने तारा ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया को 2025 में राज्य सरकार के अनुरोध और ब्लॉक की संशोधित सीमा से जोड़ते हुए अपना पक्ष रखा है। फिलहाल तारा कोल ब्लॉक को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस जारी है। भूपेश बघेल की ओर से मुख्यमंत्री साय को दी गई खुली बहस की चुनौती के बाद अब इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के दस्तावेज और आधिकारिक दावे चर्चा के केंद्र में हैं।




