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Vishwakarma Puja: विश्वकर्मा जयंती आज, कौन थे भगवान विश्वकर्मा, जिन्होंने किया था द्वारका नगरी से लेकर पुष्पक विमान का निर्माण

नई दिल्ली। Vishwakarma Puja: हर वर्ष कन्या संक्रांति के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की जयंती और पूजा का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के दिव्य शिल्पकार और निर्माण कला का आदि पुरुष माना गया है। खासतौर पर कारखानों, वर्कशॉप, दुकानों और विभिन्न कार्यस्थलों पर इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

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भगवान विश्वकर्मा को माना जाता है प्रथम शिल्पकार

सनातन परंपरा में भगवान विश्वकर्मा का विशेष स्थान बताया गया है। मान्यता के अनुसार, उन्होंने देवताओं के लिए अनेक भवनों, नगरों और दिव्य वस्तुओं का निर्माण किया था। धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं में उन्हें सृष्टि के महान वास्तुकार एवं शिल्पकार के रूप में वर्णित किया गया है। कई मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने द्वारका नगरी, स्वर्ण लंका और पुष्पक विमान जैसी दिव्य रचनाओं के निर्माण में भूमिका निभाई थी। इसी तरह सुदर्शन चक्र, त्रिशूल और अन्य दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से भी उनका नाम जोड़ा जाता है।

भगवान विश्वकर्मा की पूजा क्यों की जाती है?

मान्यता है कि विश्वकर्मा जयंती के दिन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा करने से कार्यक्षेत्र में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं। व्यापारी और कारीगर इस दिन अपने औजारों, मशीनों और कार्यस्थल की पूजा करते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा की आराधना से कारोबार में प्रगति, कार्यों में सफलता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनका आधार आस्था एवं परंपरा है।

कारखानों और कार्यस्थलों पर विशेष आयोजन

विश्वकर्मा पूजा का सबसे व्यापक आयोजन औद्योगिक प्रतिष्ठानों, फैक्ट्रियों, निर्माण इकाइयों, गैराज, वर्कशॉप और दुकानों में देखने को मिलता है। इस दिन मशीनों और औजारों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा की जाती है। कई स्थानों पर कर्मचारियों और श्रमिकों के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

कैसे करें विश्वकर्मा पूजा?

विश्वकर्मा जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल और कार्यस्थल की साफ-सफाई की जाती है। सूर्य देव को जल अर्पित करने के बाद भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा की जाती है। पूजा में दीप, धूप, फूल, अक्षत, फल और मिठाई आदि अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही मशीनों, औजारों और उपकरणों की भी पूजा की जाती है। कई जगहों पर विश्वकर्मा चालीसा, स्तोत्र और मंत्रों का पाठ किया जाता है।

मंत्र जाप की भी है परंपरा

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा के दौरान मंत्र जाप करने से मन को एकाग्रता और सकारात्मकता मिलती है। दिए गए धार्मिक स्रोत में रुद्राक्ष की माला से 108 बार मंत्र जाप करने का उल्लेख किया गया है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और आस्था के अनुसार भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करते हैं।

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श्रमिकों और कारीगरों के लिए खास पर्व

विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि श्रम और शिल्प परंपरा से भी जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इंजीनियर, कारीगर, मशीन ऑपरेटर, तकनीकी कर्मचारी, निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोग और छोटे-बड़े व्यवसायी इस दिन अपने काम और औजारों के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं। विश्वकर्मा जयंती का यह पर्व मेहनत, कौशल और निर्माण की परंपरा को महत्व देने के साथ-साथ कार्यक्षेत्र में उन्नति और समृद्धि की कामना का अवसर भी माना जाता है।

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