Chhattisgarh News: रायपुर से नारायणपुर तक कथित मेडिकल माफिया का नेटवर्क! मामूली बीमारी के नाम पर 10 दिन भर्ती, जांच के घेरे में निजी अस्पताल
नारायणपुर। Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और आयुष्मान योजना के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि रायपुर से लेकर बस्तर संभाग के दूरस्थ इलाकों तक मरीजों को इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों तक लाने वाला एक सुनियोजित नेटवर्क सक्रिय है। खास तौर पर सुदूर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को कथित तौर पर मामूली बीमारियों के इलाज के लिए लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रखने और आयुष्मान कार्ड के जरिए बड़ी रकम के क्लेम करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
अबूझमाड़ समेत दूरस्थ इलाकों से मरीज लाने का आरोप
आरोपों के मुताबिक, अबूझमाड़ और बस्तर के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मामूली स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए निजी अस्पतालों तक लाया जाता है। इनमें कमर दर्द, हाथ-पैर में दर्द, बवासीर और मोतियाबिंद जैसी समस्याओं का इलाज भी शामिल बताया जा रहा है। कथित तौर पर कुछ मरीजों को जरूरत से ज्यादा दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखे जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। आरोप है कि कई मामलों में सामान्य उपचार के लिए मरीजों को 10 दिन या उससे अधिक समय तक भर्ती रखा जाता है।
आयुष्मान कार्ड से लाखों के क्लेम का आरोप
पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप आयुष्मान भारत योजना से जुड़े हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि मरीजों के आधार कार्ड और अंगूठे के निशान का इस्तेमाल कर उनके आयुष्मान कार्ड से इलाज के नाम पर बड़ी रकम के क्लेम किए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह जांच का विषय है कि वास्तव में कितने मरीजों के नाम पर कितने क्लेम किए गए और उपचार की अवधि तथा प्रक्रिया योजना के निर्धारित नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
दलालों और अस्पताल प्रबंधन की मिलीभगत का आरोप
मामले में अस्पताल प्रबंधन से लेकर कथित दलालों तक के एक नेटवर्क की भूमिका होने का आरोप लगाया जा रहा है। दावा है कि दूरदराज इलाकों में सक्रिय लोग मरीजों को निजी अस्पतालों तक पहुंचाने का काम करते हैं, जिसके बाद अस्पताल में भर्ती और उपचार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल मरीजों के साथ धोखाधड़ी का मामला होगा, बल्कि सरकार की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना के दुरुपयोग से भी जुड़ा गंभीर प्रकरण बन सकता है।
आदिवासी मरीजों को निशाना बनाने का आरोप
इस पूरे मामले में आदिवासी और ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है। आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की सीमित उपलब्धता का फायदा उठाकर मरीजों और उनके परिजनों को निजी अस्पतालों तक लाने तथा सरकारी स्वास्थ्य योजना के माध्यम से उपचार कराने के नाम पर कथित अनियमितताओं के आरोप हैं।
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जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
Chhattisgarh News: मामले की गंभीरता को देखते हुए निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों का रिकॉर्ड, आयुष्मान कार्ड से किए गए क्लेम, उपचार की अवधि, मेडिकल दस्तावेज और मरीजों की सहमति समेत तमाम बिंदुओं की जांच जरूरी होगी। फिलहाल लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कोई संगठित गिरोह सक्रिय है या अलग-अलग मामलों में अनियमितताएं हुई हैं। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या फर्जी क्लेम साबित होते हैं तो संबंधित अस्पतालों और जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।


