CM Vijay Thalapathy On NEET Exam: ‘NEET नहीं, 12वीं के आधार पर हो चयन’, पेपर लीक विवाद के बीच सीएम विजय की केंद्र से बड़ी मांग
नई दिल्ली। CM Vijay Thalapathy On NEET Exam: देशभर में NEET-UG परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए NEET परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश का अधिकार राज्यों को मिलना चाहिए और दाखिला 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर दिया जाना चाहिए।
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संदेह के घेरे में NEET की विश्वसनीयता
मुख्यमंत्री विजय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के मामले यह दर्शाते हैं कि राष्ट्रीय स्तर की यह परीक्षा गंभीर व्यवस्थागत खामियों से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि NEET की विश्वसनीयता पहले भी कई बार संदेह के घेरे में आ चुकी है।
उन्होंने वर्ष 2024 के पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान छह राज्यों में FIR दर्ज हुई थी और मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी। इसके बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी, जिसने 95 सुधारात्मक सुझाव दिए थे। लेकिन इन सिफारिशों के बावजूद दो वर्षों के भीतर फिर पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाएं सामने आ गईं।
बताया सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना के खिलाफ
विजय ने कहा कि यह स्थिति राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की गंभीर संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर करती है। उनका कहना है कि NEET जैसी केंद्रीकृत परीक्षा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित नहीं कर पा रही है। तमिलनाडु लंबे समय से NEET का विरोध करता रहा है। राज्य सरकार और कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि यह परीक्षा सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना के खिलाफ है।
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CM Vijay Thalapathy On NEET Exam: मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र से मांग की कि राज्यों को MBBS, BDS और AYUSH पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सीटों पर 12वीं बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर प्रवेश देने की अनुमति दी जाए। हालिया पेपर लीक विवाद के बाद NEET एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। विपक्षी दल परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं, जबकि छात्र संगठनों में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है।




