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बांग्लादेशी दंपती की गिरफ्तारी पर सियासी घमासान, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

 

रायपुर में शनिवार को एक बांग्लादेशी दंपती की गिरफ्तारी ने प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए पिछले 16 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी में रह रहे इस दंपती को पकड़े जाने के बाद अब यह मामला सियासी बहस का केंद्र बन गया है। एक ओर जहां बीजेपी ने कांग्रेस पर घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

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चंद्राकर का आरोप – कांग्रेस जिम्मेदार

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने इस मामले पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में देश के कई हिस्सों, विशेषकर असम और पश्चिम बंगाल में जनसंख्या संतुलन बिगड़ा। उनके अनुसार, कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के तहत अवैध घुसपैठियों को दस्तावेज मुहैया कराए।

चंद्राकर ने सवाल उठाया कि जिन बांग्लादेशियों के पास भारत में रहने के कागजात हैं, वे किस सरकार के कार्यकाल में और किन अधिकारियों द्वारा बनाए गए, इसकी जानकारी जनता को दी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के लिए घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि वोट बैंक तैयार करने का साधन है।

भूपेश बघेल का पलटवार 

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार वर्षों से बांग्लादेशी, रोहिंग्या और पाकिस्तानी घुसपैठियों को लेकर बयान देती आ रही है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि राज्य में इनकी संख्या कितनी है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को उन्होंने विधानसभा में भी उठाया, मगर सरकार कोई ठोस जवाब नहीं दे पाई।

भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार केवल आरोप लगाने में व्यस्त है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई और पारदर्शिता की कमी साफ दिखाई देती है।

 

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16 साल से रह रहे थे रायपुर में, पहचान छिपाकर बताते थे खुद को बंगाल निवासी

रायपुर पुलिस ने शनिवार को जिस बांग्लादेशी दंपती को गिरफ्तार किया, वे लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शहर में रह रहे थे। उन्होंने हर बार खुद को पश्चिम बंगाल का निवासी बताया और इलाके के किसी भी व्यक्ति को अपनी वास्तविक पहचान की भनक नहीं लगने दी। वे लगातार किराए के मकान बदलते रहे और पुराने पते को नया पता बताते रहे।

पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है, जिन्होंने इनके फर्जी दस्तावेज बनवाने में मदद की। जांच में कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों, यहां तक कि एक पार्षद का नाम भी सामने आ रहा है।

 

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