पति वीडियो बनाता रहा, पत्नी ने बच्चे के सामने गले में फंदा डालकर की खुदकुशी
गाजीपुर में 31 वर्षीय चांदनी देवी ने पति के उकसाने और कर्ज के दबाव से परेशान होकर लिया दुखद कदम, आरोपी पति गिरफ्तार

कहलगांव : दिल्ली के गाजीपुर थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां एक विवाहिता ने अपने पति के सामने, तीन छोटे बच्चों की मौजूदगी में फांसी लगा आत्महत्या कर ली। इस दर्दनाक हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें पति वीडियो बनाते हुए पत्नी को बार-बार आत्महत्या के लिए उकसाता नजर आता है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसे देख लोग गुस्सा और सदमें में हैं।
घटना का केंद्र बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव थाना क्षेत्र का रहने वाला परिवार है। यहां की निवासी 31 वर्षीय चांदनी देवी उर्फ चंदा की शादी लगभग 12 साल पहले मुजफ्फरपुर जिले के पिपरा थाना क्षेत्र के विद्यानंद राय से हुई थी। शादी के बाद उनका दिल्ली के गाजीपुर में परिवार रहता था। चांदनी के तीन बच्चे थे जिनमें सबसे छोटा पांच साल का बच्चा था, जिसके सामने मां ने फांसी लगा ली।
पुलिस ने बताया कि चांदनी आर्थिक तंगी और कर्ज के कारण मानसिक रूप से तनाव में थी। पति विद्यानंद ने चांदनी के नाम से चार लाख रुपये का माइक्रो फाइनेंस कंपनी से लोन लिया था, जिसे लेकर दोनों के बीच लगातार झगड़ा होता था। फाइनेंस कंपनी की तरफ से भी कर्ज की वसूली के दबाव के कारण तनाव और बढ़ गया था।
वीडियो में साफ सुनाई देता है कि पति बार-बार पत्नी को कहता है, “सिर्फ फंदा बांधोगी या झूलोगी भी?” जबकि बच्चे कमरे के बाहर बैठकर रो रहे थे। पति बच्चों को डांटते हुए कहता है, “जाती है तो जाने दो,” और वीडियो बनाता रहता है। महिला ने चादर से फंदा बनाकर पंखे के हुक से लटककर आत्महत्या कर ली। बच्चा उसकी तड़प देख कर जोर-जोर से रोने लगता है। इस अमानवीय रवैये ने पूरे इलाके में आक्रोश फैला दिया।
पुलिस ने आरोपी पति विद्यानंद राय को गिरफ्तार कर लिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। मृतका के भाई राकेश मंडल ने आरोप लगाया कि महिला को पति द्वारा मानसिक और आर्थिक दबाव झेलना पड़ता था और छोड़ी नहीं जा सकने वाली परेशानियों में उसने यह कदम उठाया। परिजन थाने में लिखित शिकायत नहीं दे रहे हैं, डर और भय के कारण मामले की संवेदनशीलता बनी हुई है।
यह घटना न केवल पति के खिलाफ मानवता की हदें तोड़ देने वाली है, बल्कि घरेलू कलह, कर्ज, मानसिक दबाव और पारिवारिक हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों की भी पुष्टि करती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तरह की संवेदनशील स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान न देना और पारिवारिक संघर्षों को नजरअंदाज करना बर्बादी की राह खोलता है।




