पड़ोसी देशों से रिश्तों पर सैम पित्रोदा का विवादित बयान: “पाकिस्तान में भी मुझे घर जैसा महसूस होता है”
भारत की विदेश नीति पर बड़ा बयान, कांग्रेस और बीजेपी में दिखी खाई

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने हाल ही में भारत की विदेश नीति को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक हलचल मचा दी है। इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख पित्रोदा ने पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के साथ भारत के संबंध सुधारने पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें इन देशों में “घर जैसा महसूस” हुआ। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक दलों में घमासान मचा हुआ है।
पड़ोसी देशों के प्रति भावनात्मक बयान
सैम पित्रोदा ने IANS को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “मैं पाकिस्तान गया हूँ और मुझे वहाँ घर जैसा लगा। मैं बांग्लादेश और नेपाल भी गया हूँ, और वहाँ भी मुझे ऐसा ही महसूस हुआ। मुझे ऐसा नहीं लगा कि मैं किसी विदेशी देश में हूँ। उनकी संस्कृति, बोलचाल, खानपान मेरे जैसे हैं। हम सभी के बीच एक साझा जीनोम पूल है।” पित्रोदा ने कहा कि भारत की विदेश नीति की पहली प्राथमिकता अपने पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाने पर होनी चाहिए।
राजनीतिक विवाद और प्रतिक्रियाएं
पित्रोदा का बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध तनावपूर्ण हैं। पिछले कुछ वर्षों में दो देशों के बीच राजनयिक रिश्तों में कमी आई है, खासकर 2022 के इमरान खान की सत्तावार्ता हटने और पहलगाम आतंकी हमले के बाद। बीजेपी ने पित्रोदा की इस टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि “पाकिस्तान को घर जैसा बताकर कांग्रेस देश के प्रति वफादारी पर सवाल खड़ा कर रही है।”
कांग्रेस के अंदर भी इस बयान को पार्टी की आधिकारिक विदेश नीति से अलग माना जा रहा है, जिससे आंतरिक मतभेद भी बढ़ सकते हैं। सैम पित्रोदा पिछले कुछ वर्षों में कई बार विवादित बयानों के लिए सुर्खियों में रहे हैं, जिनमें चीन और भारत के संबंधों को लेकर दिए गए उनके विवादास्पद बयान भी शामिल हैं।
विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध
पित्रोदा का दावा है कि क्षेत्रीय देशों में चल रहे मुद्दों जैसे आतंकवाद और हिंसा के बावजूद, भारत को संवाद और सहयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए। भारत के पड़ोस में पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध हैं, जो बेहतर कूटनीति से और मजबूत किये जा सकते हैं। विशेषज्ञों के मतानुसार, हालांकि कूटनीतिक तनाव हैं, लेकिन संवाद से ही समाधान संभव है।
सैम पित्रोदा का यह बयान भारत के विदेशी नीति विमर्श में एक महत्वपूर्ण लेकिन विवादस्पद मोड़ लाया है। यह स्पष्ट है कि विदेश नीति खासकर पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच गहरे मतभेद हैं। पित्रोदा ने जहां बातचीत और समन्वय पर जोर दिया है, वहीं उनकी शैली और सन्दर्भ पार्टी के अंदर संघर्ष और बाहरी आलोचनाओं का निशाना बनी है।




