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21 सितंबर के बाद नई H-1B एप्लिकेशन पर $100,000 की फीस: USCIS का बड़ा फैसला

अमेरिका में अब 21 सितंबर 2025 के बाद दाखिल होने वाली हर H-1B वीजा नई एप्लिकेशन के लिए 100,000 डॉलर यानी करीब 83-88 लाख रुपये (रुपये की विनिमय दरों के अनुसार) की एकमुश्त फीस देनी होगी। मौजूदा धारकों और नवीनीकरण पर असर नहीं

वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क: अमेरिकी सरकार, विशेष रूप से USCIS (US Citizenship and Immigration Services), ने प्रवासी पेशेवरों के लिए अचानक एक बड़ा ऐलान कर दिया। 21 सितंबर 2025 से लागू नए नियम के तहत, अब यदि कोई व्यक्ति या कंपनी H-1B वीजा के लिए पहली बार आवेदन करती है, तो उसे सीधे 100,000 डॉलर (लगभग 83 से 88 लाख रुपये) की फीस चुकानी होगी। यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया कार्यकारी आदेश के बाद लिया गया, जिसमें स्पष्ट तौर पर “अमेरिकी कामगारों की सुरक्षा और वीजा व्यवस्था के दुरुपयोग पर लगाम” के लिए इसे सबसे अहम कदम बताया गया.


किस पर लागू होगा यह नियम?

यूएससीआईएस की नई जानकारी के अनुसार यह भारी-भरकम शुल्क सिर्फ उन नए आवेदनों पर लगेगा, जो पहली बार H-1B के लिए 21 सितंबर 2025, रात 12:01 (ईस्टर्न टाइम) के बाद फाइल किए जाएंगे। पुराने वीजा धारक, नवीनीकरण कराने वाले, या पहले से स्वीकृत मामलों वाले लोगों को यह शुल्क नहीं देना होगा। ऐसे लोग जो अमेरिका से बाहर हैं और पुनः प्रवेश कर रहे हैं, उन्हें भी फीस नहीं पड़ेगी। साथ ही, यह फीस केवल ‘वन-टाइम’ है, इसे एनुअल या रिन्यूअल शुल्क की तरह नहीं समझा जाए.

टेक, स्टार्टअप और ग्लोबल टैलेंट क्यों हैं चिंतित?
यह निर्णय आते ही आईटी-टेक सेक्टर, स्टार्टअप कम्यूनिटी और अंतरराष्ट्रीय प्रोफेशनल्स में चिंता छा गई है। विशेष तौर पर भारतीय और एशियाई पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करना कहीं अधिक महंगा और जटिल हो जाएगा, क्योंकि H-1B वीजा धारकों का सबसे बड़ा समूह भारत से आता है। 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में H-1B पर काम करने वाले 70% से अधिक लोग भारतीय हैं. अमेरिकी व्यापार और औद्योगिक संस्थाओं की राय है कि इतनी ऊंची फीस से टैलेंटेड प्रोफेशनल्स की अमेरिका में एंट्री घटेगी और स्टार्टअप्स को ‘ग्लोबल ब्रेन’ लाना महंगा पड़ेगा.

नीति कैसे लागू होगी?
आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय (DHS) और विदेशी मंत्रालय (DoS) मिलकर इस नियम की सख्त मॉनिटरिंग करेंगे। USCIS ने साफ कर दिया है कि यदि कोई आवेदन 21 सितंबर 2025 को 12:01 बजे रात से पहले दायर हुआ है तो उसमें नया शुल्क नहीं लगेगा। नियम को लागू करने में USCIS, DHS, DoS और अन्य अमेरिकी दूतावास शामिल होंगे। पहली बार 2026 की H-1B वीजा लॉटरी से इसे लागू किया जाएगा.

अफवाहें और स्पष्टीकरण
हालांकि, शुरुआत में भ्रम और अफवाहें थीं कि शायद हर साल या रिन्यूअल पर भी शुल्क लगेगा, मगर व्हाइट हाउस और USCIS ने साफ कहा– यह सिर्फ नए, पहली बार किए गए आवेदनों पर ‘एक बार का’ चार्ज है, मौजूदा प्रोफेशनल/धारकों या उनके परिवार, रिन्यूअल आवेदनों या मौजूदा लॉटरी के जीतने वालों पर कोई असर नहीं.

आगे क्या?

USCIS वाणिज्यिक सचिव और सरकारी प्रवक्ताओं के अनुसार, यह नीति अमेरिकी रोजगार बाजार को प्राथमिकता देने और H-1B सिस्टम के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए है। साथ ही, बड़े पैमाने पर उत्पन्न चिंताओं, विशेष तौर पर भारतीय समुदाय और टेक कंपनियों में, ईको सिस्टम कैसे एडजस्ट करेगा — इसका अध्ययन जारी है और आने वाले महीनों में इसमें और बदलाव हो सकते हैं.
नया नियम H-1B वीजा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाया है, जो बड़ी कंपनियों के साथ-साथ तेज़ी से बढ़ती टेक व स्टार्टअप इंडस्ट्री के लिए बड़ा इम्तिहान है। नीति का असल असर आने वाले कुछ सालों में साफ़ दिखाई देगा — क्या अमेरिका वाकई ‘सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा’ को आकर्षित करेगा या ग्लोबल टैलेंट को धीरे-धीरे खो देगा, यह वक्त बताएगा

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