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Governor Ramen Deka: राज्यपाल रमेन डेका का मीडिया छात्रों से संवाद, बोले- पत्रकारिता में सत्य को सामने लाना आपकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी

रायपुर। Governor Ramen Deka: छत्तीसगढ़ के राज्यपाल एवं कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलाधिपतिरमेन डेका ने आज सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता, शोध गतिविधियों और विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। राज्यपाल ने परिसर में AI एवं मीडिया रिसर्च सेंटर तथा नवनिर्मित सावित्री बाई फुले कन्या छात्रावास का शुभारंभ भी किया।

कुशाभाऊ ठाकरे की प्रतिमा पर अर्पित किए श्रद्धा-सुमन

विश्वविद्यालय पहुंचने पर राज्यपाल रमेन डेका ने संस्थान के प्रेरणास्रोत एवं वरिष्ठ पत्रकार-राजनेता स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय ठाकरे के साथ बिताए अपने अनुभवों और उनसे मिली प्रेरणाओं को भी साझा किया।

छात्राओं को मिलेगी मीडिया शिक्षा की बेहतर सुविधा

राज्यपाल ने कहा कि महान समाज सुधारक सावित्री बाई फुले के नाम पर कन्या छात्रावास का नामकरण महिला शिक्षा, उत्थान और सशक्तिकरण के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा का लाभ विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को मिलेगा और उन्हें मीडिया एवं जनसंचार की शिक्षा हासिल करने में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

AI और मीडिया रिसर्च सेंटर का शुभारंभ

सूचना एवं संचार तकनीक के तेजी से बदलते दौर को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय में AI और मीडिया रिसर्च सेंटर की शुरुआत की गई है। यह केंद्र मधुकर खेर मल्टीमीडिया भवन में स्थापित किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र खंडेलवाल ने राज्यपाल को केंद्र की अकादमिक गतिविधियों, शोध कार्यों और AI आधारित मीडिया अध्ययन की संभावनाओं की जानकारी दी।

कुलपति ने बताया विश्वविद्यालय का विजन

विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में राज्यपाल का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले अकादमिक सत्र की तुलना में इस वर्ष विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कुलपति ने कहा कि यह वृद्धि केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कार्य मंत्र को “Transformation Without Transaction” बताते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बीच अधिकतम बदलाव लाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय आकार में छोटा जरूर है, लेकिन “लघुता में भव्यता” के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय के तीन प्रमुख संकल्प हैं हर विद्यार्थी हुनरमंद बने। हर विद्यार्थी संस्कारयुक्त बने। विश्वविद्यालय की प्रत्येक गतिविधि में “राष्ट्र प्रथम” की भावना हो।

पत्रकारिता विद्यार्थियों को सत्य के प्रति जिम्मेदारी का संदेश

मीडिया विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ संवाद के दौरान राज्यपाल रमेन डेका ने पत्रकारिता की जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों के कंधों पर समाज ने सच्चाई को सामने लाने की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें पत्रकारिता को प्रभावित करने वाले विभिन्न दबावों और चुनौतियों का गंभीर अध्ययन करना चाहिए। इनमें TRP, विज्ञापन का दबाव, मीडिया की प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया से जुड़ी अपुष्ट सूचनाएं प्रमुख हैं। राज्यपाल ने कहा कि भविष्य के पेशेवर जीवन में विद्यार्थियों को इन चुनौतियों का साहस और विवेक के साथ सामना करना होगा। सोशल मीडिया के दौर में बिना पुष्टि के नकारात्मक या भ्रामक खबरों का प्रसार रोकना भी मीडिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

AI और सोशल मीडिया के दौर में प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता कायम

राज्यपाल ने कहा कि आज इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, AI और सोशल मीडिया तेजी से प्रभावशाली हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता समाज में अभी भी बनी हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों को फ्रीडम ऑफ स्पीच के साथ-साथ पत्रकारिता के नैतिक मानकों को समझने की सलाह दी। राज्यपाल ने कहा कि समाज में मूल्यों और मानदंडों में गिरावट के बीच पत्रकारों को अपनी जिम्मेदारी और अधिक गंभीरता से निभानी होगी। उन्होंने विद्यार्थियों को “सेल्फ सेंसर” की भूमिका समझाते हुए कहा कि एक जागरूक और जिम्मेदार पत्रकार को यह पता होना चाहिए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की सीमा कहां से शुरू होती है।

पं. माधवराव सप्रे के योगदान का किया उल्लेख

रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि 1900 में पंडित माधवराव सप्रे ने ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ का प्रकाशन शुरू किया था। उन्होंने कहा कि आज का दौर मीडिया का है और पत्रकारिता जैसे चुनौतीपूर्ण पेशे में आने वाले विद्यार्थियों का प्रमुख लक्ष्य जनता और समाज के वास्तविक मुद्दों को सामने लाना होना चाहिए। राज्यपाल ने असम के एक पत्रकार का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें समाज के उन “अनसंग हीरोज” की कहानियों को भी सामने लाना चाहिए, जिनका योगदान महत्वपूर्ण होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त पहचान नहीं मिल पाती।

नारायणी बहुभाषी समाचार पत्र संग्रहालय का प्रदर्शन

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के ग्रंथालय में “नारायणी बहुभाषी समाचार पत्र संग्रहालय” के तहत विभिन्न भाषाओं की पत्र-पत्रिकाओं के संकलन की प्रदर्शनी भी लगाई गई। साहित्यकार डॉ. मृणालिका-राजेंद्र ओझा ने राज्यपाल के समक्ष संग्रहालय की सामग्री प्रदर्शित की। इस प्रदर्शनी का संयोजन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभागाध्यक्ष डॉ. नृपेंद्र कुमार शर्मा ने किया।

 

Governor Ramen Deka: कार्यक्रम के अंत में कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने राज्यपाल को स्मृति चिह्न भेंट किया। कार्यक्रम का संचालन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष मंडावी ने किया, जबकि कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर लोक भवन के अधिकारी, विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। वरिष्ठ शिक्षकों में पंकज नयन पाण्डेय, डॉ. शाहिद अली और डॉ. राजेंद्र मोहंती सहित अन्य विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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