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Silver Import Restrictions: चांदी के आयात पर केंद्र सरकार सख्त, इंपोर्ट पर लगाई रोक, अब अनुमति नहीं ला सकेंगे सिल्वर बार।

नई दिल्ली। Silver Import Restrictions: बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से 1 साल तक सोना और चांदी की खरीदारी रोकने की अपील की थी। इसके अलावा, उन्होंने पेट्रोल और डीजल के कम-से-कम इस्तेमाल करने की बात की थी। जिसे लेकर केंद्र सरकार ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हरसंभव कोशिशें शुरू कर दी हैं।

बता दें कि, पीएम मोदी की इस अपील के बाद केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर वसूले जाने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। वहीं अब सिल्वर बार को ‘फ्री’ कैटेगरी से हटाकर ‘रेस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में डाल दिया गया है। यानी अब देश में चांदी का आयात करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी जरूरी होगी। यह फैसला शनिवार को जारी अधिसूचना के जरिए लागू किया गया।

Silver Import Restrictions: सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब देश में चांदी के आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में सिल्वर इंपोर्ट सालाना आधार पर करीब 157 फीसदी तक बढ़ गया था। लगातार बढ़ते आयात को देखते हुए सरकार ने विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने और अनावश्यक आयात पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है।

क्यों लिया गया फैसला?

जानकारों के मुताबिक, बीते कुछ महीनों में सोने और चांदी की मांग तेजी से बढ़ी है। निवेश और ज्वेलरी सेक्टर में सिल्वर की खपत बढ़ने से बड़े पैमाने पर आयात हो रहा था। इससे देश का आयात बिल बढ़ रहा था और विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ने की आशंका थी। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पहले सोना और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी थी। अब सिल्वर इंपोर्ट को ‘रिस्ट्रिक्टेड’ श्रेणी में डालकर सरकार ने निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ा दी है।

क्या होगा असर?

अब चांदी आयात करने वाली कंपनियों और व्यापारियों को केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होगी।

बिना मंजूरी सिल्वर इंपोर्ट नहीं किया जा सकेगा।

बाजार में चांदी की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

ज्वेलरी इंडस्ट्री और सिल्वर ट्रेडर्स पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है।

सरकार का लक्ष्य गैर-जरूरी आयात कम करना और विदेशी मुद्रा बचाना है।

उद्योग जगत की नजरें फैसले पर

सरकार के इस फैसले के बाद सर्राफा बाजार और इंपोर्ट सेक्टर में हलचल बढ़ गई है। कारोबारियों का मानना है कि इससे आयात प्रक्रिया धीमी हो सकती है और घरेलू बाजार में चांदी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। वहीं सरकार का तर्क है कि यह कदम आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है।

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