Jhiram Ghati Case: झीरम घाटी कांड पर सियासत तेज, NIA के फैसले पर भूपेश बघेल ने उठाए सवाल

रायपुर। Jhiram Ghati Case: झीरम घाटी नरसंहार मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अदालत के फैसले को अधूरा बताते हुए जांच के कई पहलुओं पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कह रहे थे कि मेरी जेब में पर्ची है… तो सुनिए, इस पर्ची में सवाल लिखे हैं कि आखिर झीरम कांड के असली मास्टरमाइंड और उस समय के प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
भूपेश बघेल बोले- मास्टरमाइंड अब भी सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि झीरम घाटी हमले में केवल कुछ आरोपियों को सजा मिलना पूरी तस्वीर सामने आने का प्रमाण नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि हमले के पीछे कथित मुख्य साजिशकर्ता कौन था और उस समय प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक के लिए जिम्मेदारी किसकी तय हुई?
बघेल ने कहा कि घटना में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की जान गई थी। इनमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा समेत कई नेता शामिल थे। उनके मुताबिक हमले में बड़ी संख्या में नक्सली शामिल थे, लेकिन अदालत में दोषी ठहराए गए लोगों की संख्या 10 है। उन्होंने सवाल किया कि जांच में कथित बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की पड़ताल क्यों नहीं हुई और झीरम हमले का मास्टरमाइंड अब तक सामने क्यों नहीं आया।
प्रशासनिक चूक की जांच पर भी सवाल
बघेल ने तत्कालीन सरकार के उस कथित बयान का जिक्र किया जिसमें झीरम घटना को प्रशासनिक चूक बताया गया था। उन्होंने पूछा कि अगर सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई थी तो संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या घटनास्थल पर तैनात पुलिसकर्मियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक की भूमिका की जांच हुई? क्या किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी को इस मामले में जिम्मेदार ठहराया गया? पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हमले की साजिश और प्रशासनिक चूक दोनों पहलुओं की पड़ताल नहीं हुई है, तो जांच को पूरी और पारदर्शी कैसे माना जा सकता है।
SIT जांच को लेकर भी उठाया मुद्दा
भूपेश बघेल ने कहा कि रायपुर में आयोजित मध्य क्षेत्र परिषद की बैठक के दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने झीरम मामले की जांच दोबारा कराने की मांग उठाई थी। उन्होंने दावा किया कि बाद में सुप्रीम कोर्ट से भी इस मामले में अलग FIR दर्ज कर स्वतंत्र जांच का रास्ता साफ हुआ था। बघेल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय गठित SIT की जांच को भाजपा सरकार ने आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने मांग की कि इस जांच को फिर से शुरू किया जाए और षड्यंत्र के पहलू की विस्तृत जांच हो। उनके मुताबिक, जांच में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व तक की भूमिका की पड़ताल होनी चाहिए थी।
सरेंडर नक्सलियों से पूछताछ की मांग
बघेल ने यह भी कहा कि उस समय सरकार के सामने कुछ ऐसे नक्सली मौजूद थे जिन्होंने आत्मसमर्पण किया था। उनके अनुसार, ऐसे लोगों से भी पूछताछ की जानी चाहिए थी, जिन्हें घटना और नक्सली गतिविधियों की जानकारी होने का दावा किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों और सरेंडर कर चुके नक्सलियों से एक साथ पूछताछ की जाए तो हमले से जुड़े कई अनसुलझे पहलुओं पर जानकारी सामने आ सकती है।
प्रशांत मिश्रा आयोग को लेकर भी निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने रमन सरकार के कार्यकाल में गठित प्रशांत मिश्रा जांच आयोग को लेकर भी सवाल उठाए। बघेल का दावा है कि आयोग ने जांच पूरी करने के लिए समय मांगा था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद रिपोर्ट सरकार के बजाय सीधे राज्यपाल को सौंप दी गई। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने बाद में दो सदस्यीय न्यायिक आयोग का पुनर्गठन किया था, जिसका विरोध करते हुए भाजपा नेताओं ने हाई कोर्ट का रुख किया था। बघेल ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में झीरम की सच्चाई सामने लाना चाहती है तो सभी संबंधित पक्षों से पूछताछ और लंबित जांच को आगे बढ़ाना चाहिए।
CM साय का पलटवार- सबूत थे तो जांच एजेंसी को क्यों नहीं दिए?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भूपेश बघेल के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता पहले झीरम कांड से जुड़े सबूत होने की बात करते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि यदि उनके पास कोई ठोस प्रमाण मौजूद था तो उसे जांच एजेंसी के सामने क्यों नहीं रखा गया? साय ने कहा कि NIA की जांच के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। ऐसे में फैसले पर सवाल खड़े करने के बजाय कांग्रेस को न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अदालत ने बड़ी संख्या में गवाहों के बयान और मामले से जुड़े साक्ष्यों पर विचार करने के बाद फैसला दिया है।
विजय शर्मा बोले- सबूत हैं तो NIA को सौंपें
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि किसी के पास झीरम कांड से जुड़े नए या महत्वपूर्ण सबूत हैं, तो उन्हें जांच एजेंसी को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 25 मई 2013 को झीरम घाटी में हमला हुआ था और दो दिन बाद मामले की जांच NIA को सौंप दी गई थी। उस समय केंद्र में UPA सरकार थी। बाद के वर्षों में इस मामले में गिरफ्तारियां हुईं और अब विशेष अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया है। विजय शर्मा ने कहा कि मामले में अभी आगे की कानूनी प्रक्रिया बाकी है और जांच भी जारी है। ऐसे में किसी के पास कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक आरोप लगाने के बजाय संबंधित एजेंसी के सामने रखना चाहिए।
क्या हुआ था झीरम घाटी में?
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के सुकमा क्षेत्र से कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के बाद नेताओं का काफिला जगदलपुर की ओर रवाना हुआ था। काफिले में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे। जब काफिला झीरम घाटी पहुंचा, तभी नक्सलियों ने रास्ते में रुकावट पैदा कर हमला शुरू कर दिया। हमले में कांग्रेस की तत्कालीन शीर्ष नेतृत्व टीम के कई प्रमुख नेताओं की मौत हुई।
इस घटना में नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार और विद्याचरण शुक्ल समेत कई लोगों की जान गई। लंबे समय तक चली इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। झीरम हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है और इसके बाद से ही घटना के पीछे की साजिश, सुरक्षा व्यवस्था तथा कथित प्रशासनिक चूक को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
13 साल बाद NIA कोर्ट का फैसला
झीरम घाटी हमले से जुड़े मामले में 5 सितंबर को जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाया। मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। बाकी 10 आरोपियों को अदालत ने दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से संबंधित आरोपों में दोषी माना है। दोषियों की सजा पर फैसला 16 सितंबर को सुनाया जाएगा।
दोषी ठहराए गए 10 आरोपी
- प्रमिला मोडियम
- चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
- सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम
- मुक्का मांडवी
- कोसा कवासी उर्फ कोसाराम
- आयता मरकाम
- मदकामी देवा
- जोगा मदकामी
- बनजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा
- महादेव नाग
Jhiram Ghati Case: मामले में कुल 11 आरोपी थे, लेकिन एक आरोपी की मौत हो चुकी है। अब अदालत के फैसले के बाद जहां दोषियों की सजा पर नजर है, वहीं झीरम कांड की कथित साजिश और मास्टरमाइंड को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।




