Akanksha Chaturvedi Suicide: ‘नहीं है दोबारा पेपर देने की हिम्मत’..नीट पेपर लीक के बाद छात्रा ने की आत्महत्या, राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
Akanksha Chaturvedi Suicide: नीट का पेपर लीक होने के बाद लाखों छात्रों की मेहनत पर पानी फिर गया था। जिसके बाद दोबारा पेपर कराया गया था। लेकिन इस पेपर के लीक होने के बाद बहुत से छात्र ऐसे भी थे जो हिम्मत हार चुके थे। इन्हीं में से एक मध्य प्रदेश के मऊगंज निवासी आकांक्षा चतुर्वेदी थी। जिसने हताश होकर आत्महत्या कर ली और सुसाइड नोट में लिखा की दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं है।
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बता दें कि, आकांक्षा चतुर्वेदी उर्फ स्नेहा नागपुर में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। जो की मूलरूप से मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली थी। पिता कृष्ण कुमार चौबे किसान हैं। बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना देखते हुए उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड से लाखों रुपये का कर्ज लिया था। आकांक्षा नागपुर में ‘फिजिक्स वाला’ कोचिंग में तैयारी कर रही थी।
परिजनों के अनुसार, नीट परीक्षा अच्छी हुई थी, लेकिन पेपर लीक की खबर सामने आते ही वह गहरे डिप्रेशन में चली गई। खाना-पीना छोड़ दिया और आखिरकार 31 मई की रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में आकांक्षा ने माता-पिता से माफी मांगी और लिखा, “मम्मी-पापा, आपको भरोसा था कि मैं डॉक्टर बनूंगी, लेकिन दोबारा पेपर देने की हिम्मत नहीं है। ”
वहीं आकांक्षा के सुसाइड के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी का बयान सामने आया है। जिसमें उन्होंने कहा कि,’ आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी। आकांक्षा के पिता किसान हैं। बेटी के डॉक्टर बनने के सपने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर ₹3 लाख का कर्ज़ लिया। और नागपुर में खुद कुक की नौकरी कर ली, ताकि बेटी वहाँ coaching कर सके। एक पिता ने जो कर सकता था, सब किया। फिर NEET पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द हुई। उस अनिश्चितता में आकांक्षा हमें छोड़ कर चली गई।
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Akanksha Chaturvedi Suicide: उन्होंने कहा कि,’ आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं – मोदी जी की एक भ्रष्ट, टूटी हुई व्यवस्था की देन है और धर्मेंद्र प्रधान जी? आज भी कुर्सी पर हैं फिर वही कमेटी, वही ट्रांसफर, वही जाँच, न सुधार, न न्याय। मोदी जी, कुर्सी स्थायी नहीं होती – आती-जाती रहती है। लेकिन आपने 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस हद तक बर्बाद किया है, उसकी कीमत भारत की एक पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है।’




