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 “खाद का संकट या सियासी स्टंट?” – विधानसभा मानसून सत्र में गरजे नेता, किसान फिर से चिंता में

 

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन किसान और खेती से जुड़ा मुद्दा सदन में गरमाया रहा। खाद और DAP की कथित किल्लत को लेकर विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। कांग्रेस विधायकों ने स्थगन प्रस्ताव लाकर खाद और बीज की कमी पर चर्चा की मांग की, जिसे लेकर सदन में तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर किसानों को खाद की कमी से जूझने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी सोसाइटियों में खाद नहीं, लेकिन निजी दुकानों में महंगे दामों पर उपलब्ध है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे एक सुनियोजित साजिश करार देते हुए कहा कि सरकार 21 क्विंटल धान नहीं खरीदना चाहती, इसलिए खेत में पैदावार ही घटाने की साजिश हो रही है।

 

सत्तापक्ष ने आरोप खारिज किए

इस पर कृषि मंत्री के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य में खाद और बीज की कोई कमी नहीं है, इसलिए स्थगन पर चर्चा की आवश्यकता नहीं। इसके विरोध में कांग्रेस विधायकों ने गर्भगृह में प्रवेश कर नारेबाज़ी शुरू कर दी, जिससे सभी कांग्रेस विधायक सदन की कार्यवाही से निलंबित हो गए।

DAP की कमी से नाराज किसान

पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि DAP के अभाव में किसान खेती शुरू नहीं कर पा रहे, सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसानों का विश्वास खो चुकी है।

 

तो क्या वाकई है खाद का संकट?

एक तरफ सरकार कह रही है कि खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, दूसरी तरफ विपक्ष और खुद किसान संगठन दावा कर रहे हैं कि खाद सोसाइटी में नदारद है और प्राइवेट बाजार में दो गुने दामों पर बिक रही है। इस विरोधाभास के बीच सवाल उठता है कि क्या यह वाकई संकट है या सिर्फ सियासी शोर?

 

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