Rahul Gandhi On EC: ‘वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी’, तृणमूल के नाम-चिन्ह के फैसले के बाद EC राहुल गांधी का हमला
नई दिल्ली। Rahul Gandhi On EC: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर जारी विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आयोग तथा भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP से जुड़े पिछले विवादों से करते हुए चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने ‘पार्टी चोरी’ वाले बयान से साधा निशाना
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि उन्हें शिवसेना, NCP और अब तृणमूल कांग्रेस के मामलों में एक जैसा पैटर्न दिखाई देता है। उनके आरोप के मुताबिक, भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मिलकर पार्टी को विभाजित करने और उसके चुनाव चिन्ह पर रोक लगाने की स्थिति बनती है। उन्होंने अपने पोस्ट में ‘वोट चोरी’, ‘सरकार चोरी’ और ‘पार्टी चोरी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए चुनावी लोकतंत्र पर चिंता जताई। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी मतदाताओं के जनादेश की रक्षा करना है। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग ने अपने आदेश में अलग आधार और प्रक्रिया बताई है।
चुनाव आयोग ने क्यों रोका TMC का नाम और चिन्ह?
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर 2026 को जारी अंतरिम आदेश में तृणमूल कांग्रेस के नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। यह व्यवस्था पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनावों के संदर्भ में की गई है। आयोग के अनुसार, उसके समक्ष दो प्रतिद्वंद्वी गुट खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताकर दावा कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम निर्णय के लिए विस्तृत प्रक्रिया की जरूरत है। आयोग ने कहा कि फिलहाल दोनों पक्षों को समान स्थिति में रखने के लिए अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है।
दोनों गुटों को नए नाम और प्रतीक देने होंगे
अंतरिम आदेश के तहत दोनों गुटों को आगामी उपचुनावों के लिए अलग नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प देने को कहा गया है। आयोग ने प्रत्येक पक्ष से प्राथमिकता के क्रम में तीन नाम और तीन स्वतंत्र चुनाव चिन्ह सुझाने को कहा था। यह व्यवस्था अंतिम फैसला होने तक अंतरिम रूप से लागू रहेगी। आयोग के अनुसार, अंतिम निर्णय Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैरा 15 के तहत विस्तृत सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद किया जाएगा।
उपचुनावों से पहले सामने आया बड़ा विवाद
चुनाव आयोग का यह आदेश पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले आया है। आयोग ने कहा कि दोनों पक्ष पार्टी के संगठन, अधिकृत प्रतिनिधियों, संपत्तियों, नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना-अपना दावा पेश कर रहे हैं। सीमित समय को देखते हुए आयोग ने पहले अंतरिम व्यवस्था लागू करना उचित माना।
ममता गुट ने आदेश पर जताई आपत्ति
आयोग के फैसले के बाद ममता बनर्जी गुट ने इसका विरोध किया है। तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने आदेश को कानून के अनुरूप नहीं बताया और कहा कि पार्टी इसे स्वीकार नहीं करती, हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तय प्रक्रिया के तहत आयोग को जवाब दिया जाएगा। दूसरी ओर, विरोधी गुट के नेताओं ने अंतरिम आदेश का स्वागत किया और कहा कि वे आयोग के निर्देशों का पालन करेंगे।
राहुल गांधी ने मामले को बताया व्यापक राजनीतिक सवाल
राहुल गांधी ने अपने बयान में इस विवाद को केवल ममता बनर्जी से जुड़ा मुद्दा मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह उन सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं से जुड़ा सवाल है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं। उनके अनुसार, पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े विवाद का असर व्यापक चुनावी व्यवस्था पर पड़ता है।
अब अंतिम फैसले पर रहेगी नजर
Rahul Gandhi On EC: फिलहाल चुनाव आयोग का आदेश अंतरिम है। इसका उद्देश्य आगामी उपचुनावों में दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग पहचान देना बताया गया है। पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह पर अंतिम निर्णय बाद की प्रक्रिया में लिया जाएगा। इस बीच, राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद पर चुनाव आयोग की आगे की कार्यवाही पर सभी की नजर बनी हुई है।




