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बस्तर में शांति की दस्तक, नक्सलवाद के गढ़ में राष्ट्रगान की गूंज, आजादी के बाद पहली बार 41 गांवों में लहराया तिरंगा

बस्तर। Flag Hoisting In Bastar: पूरा देश आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। हर कोई तिरंगे के रंग में रंगा है। लेकिन छत्तीसगढ़ के कई गांव ऐसे भी थे, जहां आजादी के इतने सालों बाद भी कोई तिरंगा नहीं फहराया गया था। लेकिन बस्तर क्षेत्र में आज लंबे समय के बाद लोकतंत्र का जश्न देखने को मिला। जो गांव पहले वामपंथी, उग्रवाद के चपेट में थे, जहां पहले कभी राष्ट्रीय पर्व नहीं मनाए गया था, उसी गांव में आज पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया।

बता दें कि, आजादी के 78 वर्ष बाद भी बड़ी संख्या में गांव ऐसे थे, जहां कोई भी आधुनिक सुविधा नहीं थी। वहीं आज 26 जनवरी 2026 के दिन सोमवार को नक्सल प्रभावित बस्तर के कई गांवों में लोकतंत्र की बड़ी जीत देखने को मिली है। जहां बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले के 41 गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया, जिसमें बीजापुर के 13, नारायणपुर के 18 और सुकमा के 10 गांव शामिल हैं। यह केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि नक्सलवाद पर लोकतंत्र की निर्णायक जीत का शंखनाद है।

इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज हुआ गणतंत्र दिवस 2026

सुकमा के दुर्गम अंचलों के नियद नेल्लानार के गांव तुमालभट्टी, वीरागंगलेर, मैता, पालागुड़ा, गुंडाराजगुंडेम, नागाराम, वंजलवाही, गोगुंडा, पेदाबोडकेल और उरसांगल में पहली बार गणतंत्र दिवस का पर्व मनाया गया। सुरक्षा बलों की सतत तैनाती और नवीन कैंपों की स्थापना ने वह सुरक्षा घेरा प्रदान किया, जिसके कारण ग्रामीण दशकों के भय को त्यागकर मुख्यधारा से जुड़ने आगे आए।

 

Flag Hoisting In Bastar:  नक्सलियों का प्रभाव कम होने के बाद पहली बार तिरंगा लहराया गया। गणतंत्र दिवस पर ग्रामीणों में उत्साह दिखा, क्योंकि नक्सलियों का डर अब खत्म हो गया है। बस्तर में गणतंत्र दिवस 2026 शांति और विकास के प्रतीक के रूप में मनाया जा रहा है। यह तिरंगा बस्तर के लिए शांति, लोकतंत्र और एक नई शुरुआत का मजबूत प्रतीक बनकर उभरा है।

 

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