Leaders Security Reduced : नेताओं की सुरक्षा पर बड़ा फेरबदल, 116 की सुरक्षा घटी, 9 की Z+ सुरक्षा घटकर Z हुई, लिस्ट में मंत्री केदार कश्यप भी शामिल
केदार कश्यप, कर्मा परिवार समेत कई नेताओं की सुरक्षा घटी
मिली जानकारी के अनुसार, बस्तर में नेताओं को दी जा रही सुरक्षा की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया है। कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप की सुरक्षा Z+ से घटाकर Z श्रेणी की गई है। वहीं, कर्मा परिवार को पहले मिल रही Z+ सुरक्षा में भी कटौती की गई है। इसके अलावा, बस्तर संभाग के सांसदों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों की सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई है। भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों के नेताओं पर यह निर्णय लागू होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ नेताओं की सुरक्षा Z+ से Z, कुछ की Y+ से Y और कुछ की Z से Y श्रेणी में की गई है। हालांकि, सभी 116 नेताओं के नाम और उनकी संशोधित सुरक्षा श्रेणी की विस्तृत सूची की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
सुरक्षा कम करने के पीछे क्या है वजह?
बस्तर क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों में कमी आने के बाद नेताओं और जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई गई सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही थी। पहले नक्सली खतरे को देखते हुए कई नेताओं को अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। अब मौजूदा परिस्थितियों और खतरे के आकलन के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से तय किया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों को जितनी सुरक्षा की जरूरत है, उन्हें उसी के अनुसार सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
लगातार मॉनिटरिंग के बाद लिया फैसला- गृह मंत्री विजय शर्मा
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के मुताबिक, नेताओं की सुरक्षा में बदलाव लगातार मॉनिटरिंग और समीक्षा के बाद किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए छह महीने की अवधि तय किए जाने की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा की समीक्षा हर छह महीने में की जाएगी। इसके बाद संबंधित नेताओं को मिलने वाली सुरक्षा श्रेणी में जरूरत के मुताबिक आगे भी बदलाव हो सकता है। जिन व्यक्तियों को गंभीर खतरा होगा, उनकी सुरक्षा का निर्धारण खतरे के आकलन के आधार पर किया जाएगा।
अगले छह महीने बाद फिर होगी समीक्षा
Leaders Security Reduced: सरकार की इस प्रक्रिया के तहत सुरक्षा व्यवस्था को स्थायी रूप से तय मानने के बजाय समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाएगी। अगले छह महीनों में सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों का फिर से आकलन किया जाएगा। इसके बाद तय होगा कि किस नेता की सुरक्षा बरकरार रखनी है और किसकी श्रेणी में और बदलाव की जरूरत है।/
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