Advertisement
ट्रेंडिंग-न्यूज़देशधर्मबड़ी खबरब्रेकिंग न्यूज़

Hartalika Teej 2026: क्यों मनाई जाती है हरियाली तीज? जानिए आखिर क्या है इसकी पौराणिक कथा

Hartalika Teej 2026: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसे कई जगहों पर बड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता के अनुसार, विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से इस दिन कठिन निर्जला व्रत रखती हैं। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इस साल हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा। तो चलिए जानते हैं इसका क्या महत्व है।

VD Sharma In Raipur: रायपुर पहुंचे बीजेपी सांसद वीडी शर्मा, राहुल गांधी के व्यक्तित्व को लेकर उठाए सवाल

सही तिथि और मुहूर्त

14 सितंबर को पूजा के लिए शुभ समय सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा। इस दौरान लोग शिव-पार्वती की पूजा की जा सकती है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:32 बजे से 5:19 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक रहेगा. पूजा और दान-पुण्य जैसे कार्यों के लिए यह समय उत्तम रहेगा।

माता पार्वती ने की थी कठोर तपस्या

बता दें कि, हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं और पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन तथा मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत रखती हैं। हरियाली तीज से जुड़ी पौराणिक कथा माता पार्वती की अटूट श्रद्धा, प्रेम और कठोर तपस्या की कहानी बताती है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने बचपन में ही भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने का संकल्प ले लिया था। जब वह विवाह योग्य हुईं तो उनके पिता पर्वतराज हिमालय ने उनके लिए योग्य वर की तलाश शुरू की। लेकिन माता पार्वती का मन पहले से ही भगवान शिव को पति के रूप में स्वीकार कर चुका था। अपने संकल्प को पूरा करने के लिए माता पार्वती एकांत वन में चली गईं और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या शुरू कर दी। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी साधना जारी रखी और शिव को पाने की इच्छा से तप में लीन रहीं।

108 वर्षों की तपस्या के बाद पूरी हुई मनोकामना

पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए 108 वर्षों तक कठोर तपस्या की। इस दौरान उन्होंने दृढ़ संकल्प और अटूट भक्ति के साथ भगवान शिव की आराधना की। माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। मान्यता है कि लंबे तप और साधना के बाद शिव-पार्वती का यह दिव्य मिलन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था। इसी मान्यता के चलते तीज को महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।

हरियाली तीज और हरतालिका तीज में क्या अंतर?

तीज पर्व को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कई स्थानों पर महिलाएं हरियाली तीज के दिन व्रत रखती हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में हरतालिका तीज का व्रत अधिक प्रमुख माना जाता है। कुछ पौराणिक परंपराओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था। इसी तिथि को हरतालिका तीज के रूप में मनाया जाता है।

Korba News: रील की लत बनी जानलेवा… नेटवर्क गया तो गुस्से में महिला ने उठाया खौफनाक कदम, हैरान कर देगा मामला

आस्था और दांपत्य सुख का पर्व

हरियाली तीज की कथा में माता पार्वती की तपस्या को दृढ़ संकल्प और अटूट भक्ति का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने और व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी आस्था के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में महिलाएं तीज के अवसर पर व्रत, पूजा, झूला और पारंपरिक उत्सवों में हिस्सा लेती हैं।

 

Advertisement
Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close