वन अधिकार अधिनियम को लेकर बढ़ी सियासत, चरणदास महंत ने राष्ट्रपति से की हस्तक्षेप की मांग
प्रविंस मनहर/रायपुर – छत्तीसगढ़ में वन अधिकार अधिनियम के कथित उल्लंघन को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर राज्य में वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(1)(घ) को तत्काल प्रभाव से लागू कराने की मांग की है। महंत ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि प्रदेश के 50 हजार से अधिक आदिवासी और वन निवासी परिवार आज भी अपने कानूनी अधिकारों से वंचित हैं।
उनका कहना है कि वन अधिकार कानून के तहत स्थानीय समुदायों को जलाशयों और जलक्षेत्रों पर पारंपरिक अधिकार मिलने चाहिए, लेकिन प्रदेश के लगभग 1.58 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र पर स्थानीय समुदायों की बजाय ठेकेदारों का कब्जा बना हुआ है। नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि इससे आदिवासी और वनवासी समुदायों की आजीविका प्रभावित हो रही है तथा उन्हें कानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने इसे वन अधिकार अधिनियम की भावना और प्रावधानों के विपरीत बताया। चरणदास महंत ने राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके और पात्र परिवारों को उनके अधिकार मिल सकें।




