
नई दिल्ली: पाकिस्तान द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के कई शहरों को निशाना बनाने की कोशिश की गई, लेकिन भारत के अत्याधुनिक S-400 सुदर्शन एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के इन प्रयासों को नाकाम कर दिया। यह पहली बार है जब भारत ने इस शक्तिशाली वायु रक्षा प्रणाली का सक्रिय रूप से उपयोग किया है।
भारत ने S-400 सिस्टम को रूस से 2018 में 5.43 अरब डॉलर (लगभग ₹4.65 लाख करोड़) में खरीदा था। इसके तहत भारत को कुल पांच यूनिट्स मिलने थे, लेकिन अब तक सिर्फ तीन यूनिट्स ही भारत को प्राप्त हुए हैं। शेष दो यूनिट्स की डिलीवरी में देरी हो रही है, और अब इनकी डिलीवरी 2026 की शुरुआत तक होने की संभावना जताई जा रही है।
S-400 सुदर्शन की ताकत
S-400 एक अत्याधुनिक और लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है, जो 400 किलोमीटर तक के क्षेत्र में हवाई जहाज, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को पहचानकर उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। यह प्रणाली महज 5 मिनट में सक्रिय हो सकती है, जिससे दुश्मन के हवाई हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकता है। भारत की वायु सुरक्षा को बढ़ाने के लिए इसे तैनात किया गया है।
डिलीवरी में देरी क्यों?
S-400 की डिलीवरी में पहले कोरोना महामारी और फिर रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई, जिसके कारण इनकी डिलीवरी में देरी हुई है। भारत को अब शेष दो यूनिट्स 2026 तक प्राप्त होने की उम्मीद है।
S-400 का वैश्विक उपयोग
भारत के अलावा यह सिस्टम रूस, चीन और तुर्की जैसे देशों के पास भी है। भारत ने इसे अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और वायु सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए खरीदा था, और इस प्रणाली की मदद से भारत ने पाकिस्तान के कई मिसाइल हमलों को नाकाम कर दिया है।
S-400 सुदर्शन सिस्टम की तैनाती ने भारत की वायु रक्षा क्षमता को एक नई ऊँचाई तक पहुंचाया है, जिससे भारत अपने दुश्मनों के आक्रमणों से निपटने के लिए अब और भी तैयार है।




