Advertisement
religiousट्रेंडिंग-न्यूज़धर्मबड़ी खबरब्रेकिंग न्यूज़

Shardiya Navratri 2026: कब से हो रही शारदीय नवरात्र की शुरूआत, जानें क्या है घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और विधि

Shardiya Navratri 2026: मां दुर्गा की उपासना के लिए शारदीय नवरात्र को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया गया है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में देवी के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं, घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और मां दुर्गा से सुख, शांति, समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। हर वर्ष अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र का आरंभ होता है। वर्ष 2026 में भी नवरात्र को लेकर भक्तों में उत्साह है। इस दौरान घटस्थापना, अष्टमी, नवमी और विजयादशमी जैसे प्रमुख पर्व पड़ेंगे।

CG Transfer News : जिले में 17 उप निरीक्षकों का तबादला, अलग-अलग थानों में मिली नई जिम्मेदारी, यहां देखें लिस्ट

11 अक्टूबर से शुरू होंगे शारदीय नवरात्र

द्रिक पंचांग के अनुसार, 2026 में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे से शुरू होगी और 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर शारदीय नवरात्र का आरंभ 11 अक्टूबर, रविवार से माना जाएगा। नवरात्र का समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा के साथ होगा। इसी दिन दुर्गा विसर्जन, नवरात्र पारण और कई स्थानों पर आयुध पूजा भी की जाएगी।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना को विशेष महत्व दिया जाता है। उपलब्ध पंचांग जानकारी के अनुसार, 11 अक्टूबर को घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक बताया गया है। श्रद्धालु अपनी स्थानीय पंचांग परंपरा के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करके पूजा कर सकते हैं।

महाअष्टमी और महानवमी की तारीख

नवरात्र के आठवें दिन यानी 18 अक्टूबर को महाअष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इसके बाद 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे तक अष्टमी तिथि रहने के बाद महानवमी तिथि शुरू होने की जानकारी दी गई है। अष्टमी और नवमी के संधिकाल में संधि पूजा का विशेष विधान माना जाता है। इस दौरान कई श्रद्धालु कन्या पूजन और हवन भी करते हैं। 19 अक्टूबर को महानवमी हवन के लिए सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक का समय शुभ बताया गया है।

कैसे करें घटस्थापना?

नवरात्र के पहले दिन पूजा स्थल को साफ करके पवित्र किया जाता है। परंपरा के अनुसार, घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में पूजा की व्यवस्था की जा सकती है।

इसके लिए सबसे पहले चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। इसके सामने मिट्टी का पात्र रखकर उसमें मिट्टी की परत बिछाएं और जौ बोएं। जौ पर हल्का पानी डालकर उसे अंकुरित होने के लिए रखा जाता है।

इसके बाद कलश तैयार करें। कलश पर मौली बांधकर स्वास्तिक बनाएं और उसमें शुद्ध जल भरें। परंपरा के अनुसार जल में सुपारी, सिक्का, दूर्वा, अक्षत और हल्दी जैसी पूजा सामग्री डाली जाती है। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाए जाते हैं।

नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर मौली से बांधा जाता है और कलश के ऊपर स्थापित किया जाता है। इसके बाद कलश को जौ वाले पात्र के बीच रखा जाता है।

घटस्थापना के बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए नवरात्र पूजा का संकल्प लिया जाता है। दीपक और धूप जलाकर देवी को रोली, अक्षत, पुष्प, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्र की विधिवत शुरुआत की जाती है।

नौ दिनों में किस स्वरूप की होगी पूजा?

शारदीय नवरात्र के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की आराधना की जाती है। 2026 में पूजा का क्रम इस प्रकार रहेगा:

  • 11 अक्टूबर, प्रतिपदा: मां शैलपुत्री
  • 12 अक्टूबर, द्वितीया: मां ब्रह्मचारिणी
  • 13 अक्टूबर, तृतीया: मां चंद्रघंटा
  • 14 अक्टूबर, चतुर्थी: मां कूष्मांडा
  • 15 अक्टूबर, पंचमी: मां स्कंदमाता
  • 16 अक्टूबर, षष्ठी: मां कात्यायनी
  • 17 अक्टूबर, सप्तमी: मां कालरात्रि
  • 18 अक्टूबर, महाअष्टमी: मां महागौरी
  • 19 अक्टूबर, महानवमी: मां सिद्धिदात्री
  • 20 अक्टूबर, दशमी: नवरात्र पारण, दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी और आयुध पूजा

Dubai-Tel Aviv Flight: जानें कौन है पायलट स्मित मच्छार, जिनकी सूझबूझ ने बचाई 180 यात्रियों की जान, पीएम मोदी ने भी की तारीफ

नवरात्र में रखें पूजा और व्रत का विशेष ध्यान

Shardiya Navratri 2026: नवरात्र के दौरान श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत एवं पूजा करते हैं। घर में स्वच्छता बनाए रखना, नियमित रूप से देवी की आराधना करना और पूजा के दौरान सात्विक आहार का पालन करना धार्मिक परंपराओं का हिस्सा माना जाता है। हालांकि पूजा की विधि, मुहूर्त और व्रत के नियम क्षेत्र तथा परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए विशेष अनुष्ठान या मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग अथवा पुरोहित की सलाह लेना उचित रहेगा।

 

Advertisement
Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close