CGPSC Scam Case: CGPSC घोटाला मामले के आरोपी को मेकाहार अस्पताल में VIP ट्रीटमेंट देने का मामला, केंद्रीय जेल के 3 प्रहरी बर्खास्त
रायपुर। CGPSC Scam Case: CGPSC घोटाला मामले के आरोपी टामन सोनवानी को इलाज के लिए मेकाहारा अस्पताल ले जाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कथित लापरवाही का मामला सामने आने के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। मामले की जांच के बाद तीन जेल प्रहरियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि बंदी को अस्पताल ले जाने के दौरान बिना हथकड़ी मुलाकात और अस्पताल में कथित VIP ट्रीटमेंट से जुड़ा वीडियो सामने आया था। वीडियो वायरल होने के बाद जेल प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
स्टिंग वीडियो के बाद शुरू हुई जांच
मेकाहारा अस्पताल में बंदी टामन सोनवानी से जुड़े एक वीडियो के सामने आने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। आरोप था कि अस्पताल में बंदी की सुरक्षा और निगरानी के दौरान निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। वीडियो में बंदी से बिना हथकड़ी मुलाकात किए जाने की बात सामने आने के बाद मामले की विभागीय जांच कराई गई।
जांच में तीन प्रहरी दोषी
जांच के दौरान तीनों प्रहरियों को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही का दोषी पाया गया। इसके बाद केंद्रीय जेल रायपुर के अधीक्षक ने 29 सितंबर को तीनों को सेवा से पदच्युत करने का आदेश जारी किया। जिन प्रहरियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें— संदीप कुमार माहेश्वरी — जिला जेल बालोद, नागेंद्र कुमार महतो — जिला जेल दंतेवाड़ा, पवन कुमार लहरे — जिला जेल रायगढ़ शामिल हैं।
अस्पताल ले जाने के दौरान सुरक्षा में हुई लापरवाही
मामला बंदी टामन सोनवानी को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। जेल प्रहरियों की जिम्मेदारी बंदी की सुरक्षा और निर्धारित नियमों के तहत उसकी निगरानी करना था। लेकिन जांच में नियमों के पालन में गंभीर लापरवाही सामने आने की बात कही गई है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई थी हलचल
CGPSC Scam Case: अस्पताल से सामने आए वीडियो के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया था। इसके बाद जेल विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रहरियों की भूमिका की जांच कराई। जांच पूरी होने के बाद अब तीनों के खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है। 29 सितंबर को जारी आदेश के बाद जेल विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि बंदियों की सुरक्षा और अस्पताल में उनकी निगरानी के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने पर विभागीय स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।




