बिहार में बंद पड़ी है आपकी फैक्टरी? अब बस 3 दिन में खोलने का रास्ता समझ लीजिए!
सरकार का बड़ा कदम: पुराने विवादों को सुलझाकर औद्योगीकरण को बढ़ावा. उद्यमियों को 31 दिसंबर 2025 तक मिलेगी 'एक बार की माफी', कोर्ट के लंबित मामलों का भी होगा निपटारा

पटना: बिहार राज्य औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) ने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव लाने के लिए ‘बियाडा एमनेस्टी पॉलिसी, 2025’ लागू कर दी है। इस ऐतिहासिक कदम का उद्देश्य दशकों से चल रहे पुराने विवादों को सुलझाना है, ताकि बंद और निष्क्रिय पड़े औद्योगिक इकाइयों को फिर से शुरू किया जा सके और बिहार में निवेश का माहौल तैयार हो।
किसे मिलेगा इस नीति का लाभ?
यह नीति उन सभी औद्योगिक इकाइयों पर लागू होगी, जो पहले बियाडा द्वारा आवंटित की गई थीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बियाडा से ली गई या बियाडा के तहत आने वाली जमीन पर बंद या आंशिक रूप से क्रियाशील इकाइयों के लाभुकों को नए उद्यमियों की तरह उद्योग स्थापित या पुनर्जीवित करने का अवसर दिया जा रहा है।
इस पॉलिसी में उद्यमियों को कई अहम विकल्प दिए गए हैं:
पुनरुद्धार: उद्यमी खुद भी अपनी इंडस्ट्री को फिर से चला सकते हैं।
हस्तांतरण (Transfer): अगर वे खुद नहीं चलाना चाहते, तो वे अपनी इकाई को किसी और को हस्तांतरित (ट्रांसफर) भी कर सकते हैं।
उत्पाद में बदलाव: उद्यमी अपने उत्पाद में भी बदलाव कर सकते हैं ताकि वे बाजार की मांग के अनुरूप काम कर सकें।
तीन दिन में खुलेगी फैक्ट्री का रास्ता
सरकार ने इस प्रक्रिया को बेहद आसान और तेज बना दिया है। नीति में स्पष्ट किया गया है कि जिस प्लॉट पर किसी अन्य पक्ष को जमीन आवंटित नहीं की गई है, वहाँ बंद या आंशिक क्रियाशील इकाइयों के लिए सिर्फ तीन दिनों में फैक्ट्री वापस खोलने का रास्ता बनाया गया है। उद्यमी को एक शपथ पत्र और जरूरी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करना होगा। इसके बाद बियाडा को तीन दिनों के अंदर इस पर सैद्धांतिक स्वीकृति देनी होगी। बिहार में अगले महीने मुख्य सचिव का पदभार ग्रहण कर रहे सीनियर आईएएस अधिकारी प्रत्यय अमृत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर नजर रखेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह योजना सुचारू रूप से लागू हो।
कोर्ट के लंबित मामलों का भी होगा निपटारा
इस नीति का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह कोर्ट के लंबित मामलों को भी सुलझाएगी। जब आवेदन को सैद्धांतिक स्वीकृति मिल जाएगी, तो आवेदक को उस इंडस्ट्री से जुड़े कोर्ट में चल रहे लंबित मामलों को वापस लेना होगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद, बियाडा आवेदन की बाकी औपचारिकताएं पूरी करते हुए सात दिनों के अंदर इंडस्ट्री को काम करने की अंतिम अनुमति दे देगा।
आर्थिक लाभ और शुल्क में राहत:
इस पॉलिसी के तहत, लंबित केस खत्म होने के बाद और उद्योग खोलने की अनुमति मिलने पर, इकाई को भूखंड दर का केवल 1 प्रतिशत प्रशासनिक शुल्क देना होगा। यह नीति बिहार सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें वह राज्य को एक औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करना चाहती है। पुराने मामलों को निपटाकर और नई इकाइयों को बढ़ावा देकर, यह पॉलिसी बिहार के औद्योगिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव ला सकती है और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, जो कि ‘हर घर रोजगार’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।




