RK Sinha Death: BJP के पूर्व राज्यसभा सांसद निधन, राजनीतिक और उद्योग जगत में शोक की लहर
आरके सिन्हा राजनीति और उद्योग जगत, दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान रखते थे। वह सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड यानी SIS ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन थे। उन्होंने अपनी मेहनत और दूरदर्शिता के दम पर एक छोटे स्तर से शुरू हुए कारोबार को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
पटना से शुरू किया था SIS ग्रुप का सफर
आरके सिन्हा ने वर्ष 1974 में बिहार की राजधानी पटना से SIS कंपनी की शुरुआत की थी। शुरुआत में सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में काम करने वाली इस कंपनी ने धीरे-धीरे अपना विस्तार किया और देश के साथ विदेशों में भी कारोबार स्थापित किया।
उनके नेतृत्व में SIS ग्रुप ने सिक्योरिटी और मानव संसाधन सेवाओं के क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई। आज कंपनी भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में अपनी सेवाएं दे रही है। कंपनी को एशिया-प्रशांत क्षेत्र की प्रमुख सुरक्षा एवं मैनपावर सेवा कंपनियों में गिना जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, SIS ग्रुप से 36 हजार से अधिक स्थायी कर्मचारी जुड़े हैं और इसके 3 हजार से ज्यादा कॉर्पोरेट ग्राहक हैं।
बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में थी गिनती
कारोबार के साथ-साथ आरके सिन्हा का राजनीति में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। वह भारतीय जनता पार्टी के शुरुआती दौर से जुड़े रहे और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में उनकी गिनती होती थी। उन्होंने लंबे समय तक संगठन के लिए काम किया और बाद में राज्यसभा सांसद के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। राजनीति और उद्योग जगत में एक साथ सक्रिय रहते हुए उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। पटना से शुरू किया गया उनका व्यावसायिक सफर आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा।
2025 में ब्रेन स्ट्रोक के बाद बिगड़ी थी तबीयत
जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2025 में एक बैठक से लौटने के दौरान आरके सिन्हा को अचानक ब्रेन स्ट्रोक आया था। इसके बाद उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया और लंबे समय तक उनका उपचार चला। इस घटना के बाद से ही उनकी सेहत को लेकर चर्चाएं होती रही थीं।
करीब 1 अरब डॉलर बताई गई थी संपत्ति
RK Sinha Death: आरके सिन्हा की कारोबारी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025 में फोर्ब्स के हवाले से उनकी संपत्ति करीब 1 अरब डॉलर बताई गई थी। उन्होंने सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में भारतीय कंपनी को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने राजनीति, संगठन और उद्यमिता तीनों क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ी। उनके निधन पर राजनीतिक और कारोबारी जगत के लोगों की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं।




