Rajyotsav 2026: पहली बार नक्सलमुक्त माहौल में राज्योत्सव? ‘सशक्त नारी-युवा उड़ान और माओवाद मुक्त छत्तीसगढ़’ जानें इस थीम के मायने
रायपुर। Rajyotsav 2026: छत्तीसगढ़ कल 1 नवंबर को अपना 26वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। इस बार राज्योत्सव सिर्फ सांस्कृतिक उत्सव और विकास की उपलब्धियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और बस्तर में बदलते हालात का संदेश देने वाला आयोजन भी बनने जा रहा है। राज्योत्सव 2026 की थीम ‘सशक्त नारी-युवा उड़ान और माओवाद मुक्त छत्तीसगढ़’ रखी गई है। यह थीम ऐसे समय में सामने आई है, जब केंद्र सरकार ने देश में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या शून्य होने की जानकारी दी है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या छत्तीसगढ़ पहली बार नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकलने के नए दौर में राज्योत्सव मना रहा है? इसका जवाब प्रदेश की सुरक्षा संबंधी उपलब्धियों के साथ उन चुनौतियों को समझने में छिपा है, जो दशकों तक बस्तर और आसपास के क्षेत्रों के विकास के रास्ते में बाधा बनी रहीं।
1 से 3 नवंबर तक होगा राज्योत्सव
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 का आयोजन 1 से 3 नवंबर तक नवा रायपुर के ग्राम तूता स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्योग एवं व्यापार परिसर में प्रस्तावित है। आयोजन में प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, लोक कला, विकास योजनाओं और भविष्य की संभावनाओं को प्रमुखता से प्रदर्शित करने की तैयारी है। राज्योत्सव की थीम को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में माओवाद से मुक्ति और विकास को विशेष महत्व दिए जाने की बात कही गई है।
‘सशक्त नारी-युवा उड़ान और माओवाद मुक्त छत्तीसगढ़’ का संदेश प्रदेश की पहचान, स्वच्छ-सुंदर परिवेश, विकास और सुरक्षा को एक साथ जोड़ता है। खासकर बस्तर जैसे क्षेत्र के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण है, जहां लंबे समय तक माओवादी हिंसा का असर आम जनजीवन, सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ता रहा।
क्या सच में पहली बार नक्सलमुक्त माहौल में मनाया जाएगा राज्योत्सव?
छत्तीसगढ़ का गठन 1 नवंबर 2000 को हुआ था। गठन के बाद से ही प्रदेश के बस्तर संभाग के कई इलाके माओवादी गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से प्रभावित रहे। समय-समय पर सुरक्षा बलों के अभियान, सड़क और संचार नेटवर्क का विस्तार, प्रशासन की पहुंच तथा विकास योजनाओं के जरिए इन क्षेत्रों में स्थिति सुधारने के प्रयास किए गए।
ऐसे में कहा जा सकता है कि 2026 का राज्योत्सव देश में वामपंथी उग्रवाद के प्रभाव में आई बड़ी कमी के बाद आयोजित हो रहा है। हालांकि, इसे छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहला ऐसा राज्योत्सव बताने के लिए, जिसमें नक्सली गतिविधियां पूरी तरह समाप्त हो चुकी हों, अलग से ऐतिहासिक और आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
बस्तर के लिए क्यों अहम है यह थीम?
बस्तर की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा, लोक परंपराओं और विशिष्ट जीवनशैली से है। लेकिन दशकों तक माओवादी हिंसा के कारण इस क्षेत्र की छवि सुरक्षा चुनौतियों से भी जुड़ी रही। कई इलाकों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाना कठिन रहा। माओवादी हिंसा में सुरक्षा बलों के जवानों, स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने जान गंवाई। ऐसे में माओवाद से मुक्ति की थीम उन परिवारों के संघर्ष और बलिदान की याद भी दिलाती है, जिन्होंने हिंसा का दंश झेला है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मई 2026 में बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों, शहीदों के परिजनों और नक्सल हिंसा के पीड़ितों से मुलाकात के दौरान नक्सलवाद के खिलाफ अभियान की उपलब्धियों का उल्लेख किया था। इसी दौरान बस्तर में विकास और जनसेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ परियोजना की भी घोषणा की गई।
सुरक्षा के साथ विकास की असली परीक्षा
नक्सलवाद के प्रभाव में कमी को स्थायी शांति में बदलना सबसे बड़ी चुनौती है। केवल सुरक्षा अभियानों की सफलता से किसी क्षेत्र का संपूर्ण विकास सुनिश्चित नहीं होता। इसके लिए स्थानीय लोगों का भरोसा, रोजगार के अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क और इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ भी जरूरी है।
बस्तर में विकास का अर्थ वहां की जनजातीय पहचान, परंपराओं और स्थानीय जरूरतों का सम्मान करना भी है। स्थानीय युवाओं को रोजगार और कौशल प्रशिक्षण के अवसर देना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और दूरस्थ गांवों तक प्रशासन की पहुंच सुनिश्चित करना शांति को टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
केंद्र सरकार ने भी पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ विकास संबंधी प्रयास जारी रखने की आवश्यकता बताई है। इससे स्पष्ट है कि उग्रवाद प्रभावित जिलों की सूची से बाहर होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन विकास और शांति को लंबे समय तक कायम रखना अलग और निरंतर चलने वाला काम है।
महिलाओं की भागीदारी और उपलब्धियों पर रहेगा जोर
‘सशक्त नारी’ का संदेश महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक भागीदारी को मजबूत बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सामने लाने से जुड़ा है। राज्योत्सव के दौरान विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों के जरिए महिला कल्याण, आजीविका, स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। महिला स्व-सहायता समूहों और महिला उद्यमियों की भूमिका भी इस व्यापक विषय का अहम हिस्सा है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें रोजगार तथा उद्यम के अवसर उपलब्ध कराने से परिवारों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
‘युवा उड़ान’ से प्रतिभा और रोजगार के अवसरों को मिलेगा मंच
थीम का दूसरा हिस्सा ‘युवा उड़ान’ प्रदेश के युवाओं की क्षमता, कौशल और भविष्य की आकांक्षाओं को रेखांकित करता है। युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता जैसे विषय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। राज्योत्सव में विभागीय प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से शासन की योजनाओं, उपलब्धियों और युवाओं के लिए संचालित पहलों की जानकारी साझा की जाएगी। स्थानीय कलाकारों और प्रतिभाओं को मंच देना भी आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। राज्योत्सव में प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और विकास कार्यों को प्रदर्शित करने के साथ यह संदेश देने का अवसर भी होगा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल नक्सलवाद से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोगों की मेहनत से है।
उपलब्धि के साथ जिम्मेदारी भी
Rajyotsav 2026: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 एक ऐसे दौर में आयोजित हो रहा है, जब केंद्र सरकार देश में वामपंथी उग्रवाद के प्रभाव में बड़ी कमी और प्रभावित जिलों की संख्या शून्य होने की बात कह चुकी है। ऐसे में ‘सशक्त नारी-युवा उड़ान और माओवाद मुक्त छत्तीसगढ़’ की थीम का राजनीतिक, सामाजिक और विकास संबंधी महत्व है। लेकिन नक्सलवाद से मुक्ति का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब बस्तर सहित प्रदेश के हर दूरस्थ क्षेत्र में लोग बिना भय के जीवन जी सकें, बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसलिए इस बार का राज्योत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि यह देखने का अवसर भी होगा कि सुरक्षा संबंधी उपलब्धियों को स्थायी शांति, जनविश्वास और समावेशी विकास में किस तरह बदला जा रहा है।



