सुकमा में बदलाव की बयार, बंदूक छोड़ मुख्यधारा में लौटे 2392 नक्सली, कौशल प्रशिक्षण से संवर रहा भविष्य
सुकमा। Sukma News: सुकमा से एक सकारात्मक बदलाव की खबर सामने आ रही है, जहाँ वर्षों से नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास और पुनर्वास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिला प्रशासन और राज्य सरकार की नई पहल ने हजारों युवाओं की जिंदगी को नई दिशा दी है। अब तक 2392 नक्सली बंदूक छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। इनमें से कई लोग अब आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं और समाज में अपनी नई पहचान बना रहे हैं।
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नक्सल पुनर्वास नीति 2025 से बदली तस्वीर
नक्सल पुनर्वास नीति 2025 के लागू होने के बाद सुकमा में परिवर्तन स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। इस नीति के तहत अब तक 361 पुनर्वासित नक्सलियों ने नया जीवन शुरू किया है। उन्हें कौशल विकास, रोजगार और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
कौशल प्रशिक्षण से संवर रहा भविष्य
पुनर्वास केंद्रों में युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे रोजगार के अवसरों से जुड़ सकें। कई लोगों को सरकारी नौकरियों में भी स्थान मिला है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे समाज के साथ जुड़ रहे हैं।
नई पहचान और आत्मनिर्भरता
पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से लौटे युवाओं को स्टाइपेंड, रोजगार और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बन रहे हैं, बल्कि सामाजिक रूप से भी स्वीकार्यता पा रहे हैं।
प्रशासन की पहल से सर्वांगीण विकास
सुकमा जिला प्रशासन की पहल से आत्मसमर्पित नक्सलियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
इस बदलाव में महिलाओं की भी अहम भागीदारी है। 115 महिलाओं ने पुनर्वास का रास्ता अपनाया है, जिन्हें प्रशिक्षण के साथ-साथ मोबाइल फोन भी दिए गए हैं, ताकि वे डिजिटल दुनिया से जुड़ सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।




