
रायपुर : छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के खरोरा क्षेत्र में स्थित एक मशरूम फैक्ट्री से महिला एवं बाल विकास विभाग ने 97 मजदूरों को बंधक स्थिति से मुक्त कराया है। इन मजदूरों में उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के पुरुष, महिलाएं और छोटे बच्चे तक शामिल हैं। एक बच्चे की उम्र 10 दिन तक बताई जा रही है।
मजदूरी के नाम पर बंधक, 16-18 घंटे का जबरन काम
उत्तर प्रदेश के जौनपुर से लाए गए मजदूर वीरेंद्र ने बताया कि ठेकेदार भोला उन्हें “बैठे-बैठे मशरूम पैकिंग” का झांसा देकर लाया था और ₹10,000 प्रति माह वेतन का वादा किया गया था। लेकिन रायपुर पहुंचने पर उन्हें मशरूम काटने, भारी बोझ उठाने जैसे कठिन कार्यों में झोंक दिया गया।
मजदूरों से 16 से 18 घंटे काम कराया जाता था। जब वे थककर सोने की कोशिश करते, तो मारपीट कर जगा दिया जाता। उन्हें कमरे में बंद करके रखा जाता ताकि भाग न सकें। खाने में अधपका चावल-दाल दिया जाता था और बाहर खाने या निकलने की अनुमति नहीं थी।

अंधेरे में फैक्ट्री से भागे, पैदल पहुंचे रायपुर
फैक्ट्री में लंबे समय से हो रहे अत्याचार से परेशान होकर कुछ मजदूर 2 जुलाई की रात फैक्ट्री से चुपचाप भाग निकले। उन्होंने लगभग 15 से 20 किलोमीटर पैदल चलकर रायपुर के भाठागांव बस स्टैंड तक पहुंचकर मदद मांगी। स्थानीय लोगों ने उनकी हालत देखकर तुरंत पुलिस और विभाग को सूचित किया।
97 मजदूरों को कराया गया रेस्क्यू
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी शैल ठाकुर ने बताया कि उन्हें बंधुआ मजदूरी और शोषण की शिकायत मिली थी, जिसके बाद रेड कर फैक्ट्री से 97 मजदूरों को मुक्त कराया गया। इनमें यूपी के भदोही से 30, जौनपुर से 38, बनारस से 5, बिहार-झारखंड से 24 मजदूर शामिल हैं।

महिला मजदूरों और बच्चों के शोषण की जांच जारी
फिलहाल विभाग द्वारा महिला मजदूरों और बच्चों के साथ हुए शोषण की विशेष जांच की जा रही है। सभी मजदूरों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और आगे की कार्रवाई जारी है।




