
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सकरी स्थित राज्य के एकमात्र मानसिक अस्पताल की बदहाली को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई जारी है। कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में अस्पताल की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में न तो डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ समय पर ड्यूटी पर आते हैं और न ही मरीजों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
गंदगी और जर्जर भवन, मरीजों को नहीं मिल रही सुविधाएं
कोर्ट कमिश्नर ने बताया कि अस्पताल का भवन जर्जर है, दीवारें गंदी हैं, बाथरूम साफ नहीं हैं और वाटर कूलर भी गंदगी से भरे हैं। ओपीडी में रोजाना लगभग 150 मरीज पहुंचते हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन के लिए कोई टोकन व्यवस्था नहीं है, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बनी रहती है।
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स्टाफ की मनमानी और लापरवाही उजागर
कोर्ट कमिश्नर एडवोकेट ऋषि राहुल सोनी ने 23 मई और 6 जून को अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अस्पताल में अधीक्षक, मनोचिकित्सक, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और मेडिकल ऑफिसर सहित सभी प्रमुख पदों पर नियुक्तियां तो हैं, लेकिन अधिकांश डॉक्टर और स्टाफ समय पर नहीं आते और बायोमेट्रिक उपस्थिति भी दर्ज नहीं करते, जिससे अनुशासनहीनता साफ दिखाई देती है।
हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, अगली सुनवाई 16 जुलाई को
कोर्ट में रिपोर्ट पेश होने के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्वास्थ्य सचिव से इस मामले में 27 जून की रिपोर्ट के आधार पर शपथ पत्र मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी।
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जनहित याचिका पर हो रही है सुनवाई
बिलासपुर के इस मानसिक अस्पताल की अव्यवस्था को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर जांच रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में अस्पताल की दयनीय स्थिति उजागर होने पर अब प्रशासनिक जवाबदेही तय होने की उम्मीद है।




