रायपुर : छत्तीसगढ़ में वाणिज्यिक कर (GST) मंत्री ओपी चौधरी ने विभाग में बड़े पैमाने पर फेरबदल करते हुए 200 अधिकारियों का तबादला किया है। इसे विभाग की “मेजर सर्जरी” कहा जा रहा है, क्योंकि यह विभागीय कुल स्ट्रेंथ का लगभग आधा हिस्सा है। इस कदम से विभाग में खलबली मच गई है और कई अधिकारी वकीलों से संपर्क कर रहे हैं।
वर्षों से जमे अधिकारियों को हटाया गया
इस तबादले में कई अधिकारी ऐसे थे जो 10-18 वर्षों से एक ही पद और स्थान पर जमे हुए थे। कुछ तो अपने गृह जिले में ही वर्षों से पदस्थ थे, जबकि नियमों के अनुसार गृह जिले में पोस्टिंग वर्जित है।
उदाहरण के तौर पर:
- 08 राज्य कर उपायुक्त अपने गृह जिले में 5 वर्षों से पदस्थ थे
- 178 राज्य कर अधिकारी/निरीक्षक 4-5 साल से एक ही जगह
- 34 राज्य कर अधिकारी और 45 निरीक्षक 5 सालों से गृह जिले में तैनात
ऐसी पोस्टिंग से व्यापारियों से निजी संबंध विकसित होने और पारदर्शिता में कमी आने की संभावना रहती है।
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25 साल बाद 18 जिलों में खुले GST ऑफिस
अब तक छत्तीसगढ़ के 18 जिलों में GST कार्यालय नहीं थे। व्यापारियों को रायपुर या बिलासपुर जाकर काम करना पड़ता था। पहली बार दंतेवाड़ा, कोंडागांव, जशपुर, सक्ती और सारंगढ़ में GST वृत्त स्थापित किए गए हैं और नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
राजस्व संग्रहण के लिए नई इकाइयों का गठन
विभाग ने रेवेन्यू कलेक्शन को बढ़ाने के उद्देश्य से बिजनेस इंटेलिजेंस यूनिट (BIU) और ऑडिट यूनिट का गठन किया है, जिनमें अधिकारियों को पदस्थ किया गया है।
महिला अधिकारियों और दंपतियों को राहत
इतने बड़े फेरबदल के बावजूद सरकार ने यह ध्यान रखा है कि:
- पति-पत्नी को एक ही जिले में पोस्टिंग दी जाए
- महिला अधिकारियों को निकटवर्ती जिलों में ही स्थानांतरित किया जाए
नई सरकार का पारदर्शिता पर फोकस
मंत्री ओपी चौधरी के नेतृत्व में विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वर्षों से जमी जड़ें अब हिलेंगी, और विभागीय कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही लाई जाएगी। यह बदलाव राज्य की जीएसटी वसूली और कारोबारी सुगमता को भी नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।




