
GOPALGANJ. गोपालगंज में शराबबंदी के बावजूद माफियाओं का आतंक बेकाबू हो चला है! शनिवार तड़के विशंभरपुर के सिपाया इंजीनियरिंग कॉलेज के पास शराब तस्करों ने उत्पाद विभाग की टीम पर हमला कर दिया, जिसमें होमगार्ड जवान अभिषेक कुमार शर्मा की दर्दनाक मौत हो गई. दूसरा जवान गंभीर रूप से घायल है. इससे पहले शुक्रवार रात बैकुंठपुर के चमनपुरा में डायल-112 चालक उमेश पांडेय को शराब बेचने का विरोध करने पर गोली मार दी गई.
सिपाया में खूनी खेल
शनिवार सुबह 4:30 बजे यूपी से शराब की खेप लाने की खबर पर उत्पाद विभाग की चार जवानों की टीम दो बाइकों पर सिपाया की ओर रवाना हुई. लेकिन वहां तस्करों ने कथित तौर पर उन पर धावा बोल दिया. होमगार्ड जवान अभिषेक कुमार शर्मा (कुचायकोट, बंगाल खाड़) के सिर पर गहरी चोट लगी, और खून बहने से उनकी मौत हो गई. परिजनों ने इसे तस्करों की साजिश बताया, लेकिन पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने दावा किया कि गड्ढे में बाइक अनियंत्रित होने से हादसा हुआ. घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से सच्चाई का खुलासा होने की उम्मीद है. उत्पाद विभाग के डिप्टी कमिश्नर संजय कुमार और मद्य निषेध अधीक्षक अमृतेश कुमार जांच में जुटे हैं.
शराब विरोध पर गोलीबारी: जमीन विवाद या माफियाओं का दबदबा?
शुक्रवार देर रात बैकुंठपुर के चमनपुरा में डायल-112 चालक उमेश पांडेय को शराब बेचने का विरोध करना भारी पड़ गया. छुट्टी पर घर आए उमेश को माफियाओं ने गोली मार दी, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. उनके बेटे ने छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की, लेकिन सदर-टू एसडीपीओ राजेश कुमार ने इसे जमीन विवाद से जोड़ा. पुलिस आरोपियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी कर रही है.
शराबबंदी पर सवाल: माफिया क्यों बेलगाम?
गोपालगंज में शराब तस्करी के खिलाफ यह तीसरी बड़ी वारदात है. पिछले महीने कुचायकोट में होमगार्ड जवान बसंत मांझी को तस्करों ने गोली मारी थी. यूपी से सटी सीमा और पुलिस की ढीली कार्रवाई ने माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं. परिजनों ने दोनों मामलों में CBI जांच की मांग की है, ताकि साजिश का पर्दाफाश हो. क्या बिहार में शराबबंदी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?




