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CET Exam Controversy : ‘इसे उतारो, वरना परीक्षा नहीं देने देंगे’, CET परीक्षा के दौरान छात्रों से उतरवाए जनेऊ, अब बढ़ा विवाद

बेंगलुरु CET Exam Controversy : बीते दिनों लेंसकार्ट के द्वारा जारी किए गए एक गाइडलाइन में कंपनी के कर्मचारी पर कलवा, तिलक और बिंदी लगाने पर रोक लगाई गई थी। जिसके बाद विवाद शुरू हो गया था। वहीं ऐसा ही एक मामला बेंगलुरू के कृपानिधि कॉलेज से सामने आया है। (CET Exam Controversy) जहां संयुक्त प्रवेश परीक्षा (CET ) के समय 5 ब्राह्मण छात्रों को जनेऊ उतारने के लिए कहा गया। इस घटना के बाद विवाद खड़ा हो गया।

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दरअसल, CET परीक्षा देने पहुँचे एक छात्र ने बताया कि, “ मैं सुबह 9:40 बजे सेंटर पहुँच, लेकिन अंदर जाने से रोक दिया गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि मैंने जनेऊ पहन रखा था। मुझसे कहा गया कि, “इसे उतारो, वरना परीक्षा नहीं देने देंगे!” करीब 7 और छात्रों के साथ भी यही हुआ। मजबूरी में हमें जनेऊ उतारना पड़ा। मैं मानसिक रूप से इतना विचलित हो गया कि परीक्षा भी ठीक ढंग से नहीं दे पाया। ”

वहीं मामले में कुछ छात्रों ने बताया कि, उनके हाथ पर बंधा कलावा भी हटाया गया। परीक्षा खत्म होने के बाद छात्रों के अभिभावक परीक्षा केंद्र पर पहुंचे और उन्होंने इस कार्रवाई की मंशा पर सवाल उठाए, क्योंकि जनेऊ नहीं उतरवाने के पहले से ही स्पष्ट निर्देश थे।  वहीं कॉलेज ने जांच पूरी होने तक संबंधित निरीक्षकों को निलंबित कर दिया।

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कर्नाटक के मंत्री MC सुधाकर ने कहा कि, “CET परीक्षा के दौरान, कुछ लड़कों से उनका पवित्र धागा (जनेऊ) हटाने के लिए कहा गया। अधिकारियों ने इसे बेहद परेशान करने वाला बताया, और ध्यान दिलाया कि पिछले साल भी इसी तरह की घटनाएँ हुई थीं, जिन्होंने पूरे राज्य का ध्यान खींचा था और जिनके बाद सख्त निर्देश जारी किए गए थे। स्पष्ट दिशानिर्देशों और ड्रेस कोड की निगरानी के लिए विशेष अधिकारियों की तैनाती के बावजूद, यह समस्या फिर से सामने आई है, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि क्या यह जानबूझकर किया गया था।

CET Exam Controversy : उन्होंने बताया कि, सरकार ने इस कृत्य को मानवाधिकारों और निजता का उल्लंघन बताया और इस बात पर ज़ोर दिया कि, किसी भी छात्र को अपने धर्म और शिक्षा में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। परीक्षा केंद्र के प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया गया है और उपायुक्त से इस मामले में कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। अधिकारी कानूनी प्रावधानों की भी समीक्षा कर रहे हैं ताकि नियमों का और अधिक सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके और भविष्य की परीक्षाओं में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।”

 

 

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