Raksha Bandhan 2026: हर राज्य की राखी है खास, जानिए भारत की 7 अनोखी परंपराएं
कहीं पेड़ों को राखी बांधी जाती है,कहीं होती है समुद्र देवता की पूजा
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे मनाने का तरीका काफी अलग देखने को मिलता है। कहीं भाई-बहन के रिश्ते के साथ प्रकृति की रक्षा का संदेश जुड़ा है तो कहीं समुद्र और धार्मिक परंपराओं के साथ इस पर्व को मनाया जाता है। कई जगहों पर सैनिकों और पुलिसकर्मियों को राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और आभार भी जताया जाता है। आइए जानते हैं भारत के अलग-अलग राज्यों में रक्षाबंधन से जुड़ी कुछ खास और अनोखी परंपराओं के बारे में।
राजस्थान: पेड़ों को भी बांधी जाती है राखी
राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में रक्षाबंधन पर भाई की कलाई के साथ पेड़ों को भी रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा देखने को मिलती है। इस दौरान लोग प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेते हैं। कुछ स्थानों पर भाई को सम्मान के प्रतीक के रूप में राजतिलक करने की परंपरा भी निभाई जाती है। इस तरह यहां रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है।
महाराष्ट्र: नारली पूर्णिमा के रूप में खास है पर्व
महाराष्ट्र में रक्षाबंधन का पर्व कई स्थानों पर नारली पूर्णिमा से जुड़ा हुआ है। खासकर कोली समुदाय के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर समुद्र की पूजा की जाती है और समुद्र देवता को नारियल अर्पित किया जाता है। मछुआरा समुदाय समुद्र में सुरक्षित रहने और अच्छी आजीविका की कामना के साथ यह परंपरा निभाता है।
उत्तर प्रदेश: सैनिकों और पुलिसकर्मियों को राखी
उत्तर प्रदेश के कई शहरों में रक्षाबंधन के मौके पर बहनें अपने भाइयों के अलावा देश की सुरक्षा में जुटे सैनिकों और पुलिसकर्मियों को भी राखी बांधती हैं।इस परंपरा के जरिए महिलाएं और बच्चे सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं। कई जगहों पर स्कूलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
झारखंड और छत्तीसगढ़: समुदाय से जुड़ा रक्षा सूत्र
झारखंड और छत्तीसगढ़ की कई आदिवासी परंपराओं में रक्षा सूत्र का महत्व केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं माना जाता। यहां राखी को सामुदायिक एकता और सुरक्षा की भावना से भी जोड़ा जाता है।स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार, यह पर्व परिवार और समुदाय के बीच आपसी जुड़ाव को मजबूत करने का अवसर बनता है।
उत्तराखंड: धार्मिक परंपराओं से जुड़ा रक्षाबंधन
देवभूमि उत्तराखंड में रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व भी खास है। कई स्थानों पर इस दिन धार्मिक अनुष्ठान और श्रावणी संस्कार किए जाते हैं।पंडित यजमान को रक्षा सूत्र बांधते हैं। इस परंपरा में रक्षाबंधन को आध्यात्मिकता, धार्मिक आस्था और मंगलकामना से जोड़ा जाता है।
कर्नाटक: राखी के साथ धार्मिक परंपराओं का मेल
कर्नाटक में भी रक्षाबंधन अलग-अलग समुदायों में अपनी स्थानीय परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है। भाई-बहन के बीच राखी बांधने के साथ कई परिवार धार्मिक पूजा और पारिवारिक अनुष्ठान करते हैं।यहां पर्व का मुख्य भाव परिवार के बीच प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की रक्षा की कामना से जुड़ा रहता है।
गुजरात: रक्षा सूत्र और सामाजिक जुड़ाव
गुजरात के कई हिस्सों में रक्षाबंधन पारिवारिक उत्सव के साथ सामाजिक जुड़ाव का अवसर भी बनता है। भाई-बहन एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।कई स्थानों पर धार्मिक स्थलों और सामाजिक संस्थाओं की ओर से भी रक्षा सूत्र बांधने के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
अलग परंपराएं, लेकिन संदेश एक
भारत की विविधता रक्षाबंधन के पर्व में भी दिखाई देती है। अलग-अलग राज्यों में रस्में और रीति-रिवाज भले ही अलग हों, लेकिन हर जगह इस पर्व का मूल भाव प्रेम, विश्वास, सुरक्षा और रिश्तों की मजबूती से जुड़ा हुआ है।यही वजह है कि रक्षाबंधन सिर्फ भाई की कलाई पर बंधी राखी तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार, समाज, प्रकृति और देश की सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक भी बन गया है।




