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रायपुर

Dussehra 2026: रायपुर में 6 जगह होगा रावण दहन, WRS मैदान में जलेगा 101 फीट का रावण; खारून नदी में विसर्जन पर रोक

रायपुर। राजधानी रायपुर में दशहरा पर्व को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। 20 अक्टूबर को शहर में छह स्थानों पर रावण दहन किया जाएगा। WRS मैदान में 101 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा, जबकि रावणभाठा, चौबे कॉलोनी, राजेंद्र नगर, शंकर नगर और रामकुंड स्थित स्वामी विवेकानंद आश्रम के पास भी आयोजन होंगे। दूसरी ओर, दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए नगर निगम ने खारून नदी में सीधे विसर्जन पर रोक लगाई है। श्रद्धालुओं को नदी के पास बनाए गए निर्धारित विसर्जन कुंड में ही प्रतिमाओं का विसर्जन करना होगा।

नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने दशहरा आयोजन और विसर्जन की व्यवस्थाओं के लिए अधिकारियों की समिति गठित की है। समिति को विसर्जन स्थल पर रोशनी, शामियाना, माइक, अग्निशमन वाहन और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। निगम ने निर्देश दिए हैं कि विसर्जन के बाद कुंड में जमा मलबा, बांस-बल्लियां और अन्य सामग्री 24 घंटे के भीतर हटाई जाए, ताकि पानी प्रदूषित न हो। विसर्जन की व्यवस्था 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर की सुबह 6 बजे तक निर्धारित की गई है।

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WRS मैदान: रेलवे ट्रैक के आसपास बैरिकेडिंग,करीब 250 जवान सुरक्षा में तैनात

WRS मैदान में दशहरा उत्सव के दौरान भीड़ को देखते हुए रेलवे ने भी सुरक्षा इंतजाम किए हैं। मैदान के पास से गुजरने वाली मुंबई-हावड़ा रेल लाइन पर उरकुरा से रायपुर स्टेशन के बीच ट्रेनें दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे तक अधिकतम 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। रेलवे ट्रैक के आसपास बैरिकेडिंग की जाएगी और करीब 250 जवान सुरक्षा में तैनात रहेंगे। ट्रेनों के संचालन में 5 से 10 मिनट तक की देरी होने की संभावना है। शाम के समय फाफाडीह से WRS मैदान तक यातायात का दबाव बढ़ सकता है।

बोरियाखुर्द,बूढ़ापारा में होगा दशहरा उत्सव, रावण बनाना हुआ महंगा

बोरियाखुर्द के खेल मैदान में 45 फीट ऊंचे रावण और 30-30 फीट के कुंभकर्ण व मेघनाथ के पुतलों का दहन होगा। यहां रामलीला, सांस्कृतिक कार्यक्रम, आतिशबाजी और भजन गायन भी होगा। वहीं, बूढ़ापारा के सप्रे स्कूल मैदान में शाम 6 बजे 50 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा।

इस बार रावण के पुतले बनाने की लागत में भी 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। कारीगरों के मुताबिक, बांस, कागज, कपड़े, पेंट और सजावट की सामग्री महंगी होने से खर्च बढ़ा है। पुतले की ऊंचाई के साथ सामग्री और मजदूरी की लागत भी बढ़ जाती है। दशहरा और विसर्जन के दौरान नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें व्यवस्थाएं संभालेंगी।

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